गांव थिरोट निवासी ललिता गौतम पुत्री वेदप्रकाश का शव रोहटा क्षेत्र के जंगल में पड़ा मिला। शव के कपड़ों से मिले आधार कार्ड से उसकी पहचान हुई। परिजनों ने पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
रोहटा थाना क्षेत्र के गांव उकसिया के जंगल में रविवार दोपहर ईख के खेत में बीए की छात्रा ललिता गौतम (21) का क्षत-विक्षत शव मिलने से सनसनी फैल गई। शव की पहचान उसके पास मिले आधार कार्ड से हुई। मृतका के परिजनों ने अपहरण के बाद हत्या की आशंका जताई है, वहीं उन्होंने स्थानीय पुलिस पर कार्रवाई में लापरवाही का आरोप भी लगाया है।
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जानकारी के अनुसार, गांव उकसिया निवासी किसान श्योपाल पुत्र महावीर रविवार दोपहर अपने ईख के खेत की सिंचाई करने गए थे। इसी दौरान उन्हें खेत में एक युवती का शव पड़ा दिखाई दिया। किसान ने तत्काल इसकी सूचना रोहटा पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेने पर पता चला कि उसका चेहरा और एक हाथ आग से झुलसा हुआ था, जैसे उसकी पहचान मिटाने का प्रयास किया गया हो।
शव के कपड़ों की तलाशी लेने पर एक पर्स मिला, जिसमें आधार कार्ड था। आधार कार्ड पर ग्राम थिरोट निवासी ललिता गौतम पुत्री वेदप्रकाश का पूरा पता लिखा था। पुलिस ने इस आधार पर परिजनों को सूचित किया। पता चला कि मृतका के पिता वेदप्रकाश पिछले करीब सात महीने से गगन एंक्लेव, रोहटा रोड थाना टीपीनगर में किराए पर रह रहे हैं और रोहटा रोड बाईपास पर टेलरिंग का काम करते हैं।
परिजनों ने मौके पर पहुंचकर शव की पहचान की। उन्होंने बताया कि ललिता दो दिन पूर्व आरजी कॉलेज में बीए तृतीय वर्ष की परीक्षा देने गई थी और उसके बाद से लापता थी। परिजनों ने पहले ही गांव निवासी एक युवक पर ललिता के अपहरण की आशंका जताते हुए थाना टीपीनगर में तहरीर दी थी। हालांकि, पुलिस ने उनकी तहरीर पर अपहरण का मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया था।
आरोप है कि 16 मई को परिजनों से मनमाफिक तहरीर लिखवाकर गुमशुदगी दर्ज की गई थी। उसी दिन से ललिता की तलाश की जा रही थी, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। उसका मोबाइल भी उसी दिन से स्विच ऑफ आ रहा था। परिजनों ने अनहोनी की आशंका भी जताई थी, लेकिन पुलिस ने उनकी नहीं सुनी।
रविवार को शव मिलने की सूचना पर मौके पर पहुंचे परिजनों ने थाना टीपीनगर पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। उनका कहना था कि यदि पुलिस ने समय रहते तत्परता दिखाते हुए मोबाइल की सीडीआर निकालकर तत्काल कार्रवाई की होती, तो ललिता की जान बचाई जा सकती थी।
रोहटा थाना पुलिस ने हंगामा कर रहे परिजनों को शांत कराया और शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल भेजा। इससे पहले, फोरेंसिक टीम ने भी मौके पर पहुंचकर नमूने लिए और जांच पड़ताल की।
छह महीने पहले ही गांव छोड़कर शहर में रहने लगा था परिवार
मृतका के पिता वेदप्रकाश के अनुसार, उन्होंने करीब छह महीने पहले गांव छोड़कर मेरठ में किराए पर रहना शुरू किया था। पीड़ित पक्ष ने रोहटा पुलिस को गांव निवासी एक ज्ञात व्यक्ति और दो अज्ञात के खिलाफ तहरीर दी है। अभी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है।