मौसम और हवा की गति से प्रभावित होगा प्रदूषण
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की मौसम वेधशाला में अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री और रात का न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही के अनुसार, हवा की गति बढ़ने से प्रदूषण के स्तर में गिरावट आई है। उन्होंने आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव की संभावना जताते हुए फिलहाल प्रदूषण का स्तर कम रहने की बात कही।
मौसम में बदलाव, हवा की गति और दिशा वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। हवा चलने से प्रदूषक कणों का स्थानीय स्तर पर जमाव कम हो सकता है। हालांकि, प्रदूषण का स्तर आगे कैसा रहेगा, यह मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
प्रदूषण से राहत, लेकिन सांस के मरीजों की परेशानी बरकरार
मेरठ में प्रदूषण के स्तर में गिरावट के बावजूद सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों की परेशानी बनी हुई है। खांसी, सांस लेते समय खरखराहट और निमोनिया के मामलों में बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है। अस्पतालों में निमोनिया के मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी होने की बात कही गई है।
जानकारी के अनुसार, महीने की शुरुआत में मेडिकल कॉलेज में रोजाना निमोनिया के 30 से 35 मरीज पहुंच रहे थे। अब यह संख्या बढ़कर प्रतिदिन 70 से 80 तक पहुंच गई है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के अलावा निजी अस्पतालों तथा चिकित्सकों के क्लीनिकों में भी मरीजों की संख्या बढ़ने की बात कही गई है।
बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी के अनुसार, निमोनिया का असर बच्चों और बुजुर्गों में अधिक देखा जा रहा है। प्रदूषण के स्तर में सुधार के बावजूद सांस संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।