खेल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ये हैं मांगें
- खेल उद्योग में निवेश किया जाए, निवेशकों को लाभ मिलेगा तभी निवेशक इस उद्योग से जुड़ेंगे और पूंजी आएगी।
- सस्ती दरों पर जमीन मिले। निर्यात में छूट जैसे बैंक ब्याज में छूट दें। सस्ती दरों पर लोन या ब्याज रहित लोन दिया जाए।
- टेक्सटाइल की तरह लेबर इन्सेंटिव खेल कारोबार में मिले।
- इंफ्रास्ट्रक्चर, कच्चा माल, जीएसटी रिफंड की समस्या दूर हो।
- निर्यात जैसे घरेलू कारोबार व ट्रेडफेयर में छूट मिले।
- चीन व अन्य देशों की तरह अंतरराष्ट्रीय खेल इवेंट में जाने के लिए सरकार कंपनियों को बढ़ावा दे।
- अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में कंपनियों को टेबल उपलब्ध कराए।
- खेल उत्पादों के शोध एवं विकास पर काम हो।
मुख्य बिंदु
- मेरठ में 3500 से अधिक खेल एवं फिटनेस उपकरण इकाइयां संचालित।
- जिले की 20 बड़ी कंपनियां करती हैं निर्यात
- बल्ला, क्रिकेट किट, गेंद, टेबल टेनिस, एथलेटिक्स, जिम व फिटनेस कारोबार का बड़ा हब।
- विश्व स्तरीय सभी खेल मुकाबलों में जाते हैं यहां से उपकरण।
क्या बोले कारोबारी
खेल कारोबार को बढ़ाने के लिए अलग से खेल उद्योग मंत्रालय बने या फिर खेल मंत्रालय से इसे जोड़ें तो खेल मंत्रालय को उद्योग के अधिकार दिए जाएं।
- राकेश कोहली, निदेशक, स्टैग इंटरनेशनल
खेलों को करिकुलम में अनिवार्य किया जाए। विदेशों में यही सिस्टम है। तभी खेलों को बढ़ावा मिलेगा। ग्राउंड वर्क्स पॉलिसी पर काम हो। आपसी प्रतियोगिता की जगह एक कंपनी एक काम का सिस्टम लागू हो।
- अंबर आनंद, निदेशक, नेलको इंटरनेशनल
खेल और फिटनेस उपकरण कारोबार को बढ़ावा देने के लिए यहां खेल विवि का होना जरूरी है। तभी उपकरणों पर लगातार शोध होगा। खिलाड़ी की जरूरत मुताबिक नए उपकरण बनेंगे, जो उद्योग को और बढ़ाएंगे। गुणवत्ता भी बढ़ेगी।
- शेखर भल्ला, निदेशक, भल्ला स्पोर्ट्स
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