सुबह से रिपोर्ट के इंतजार में ग्रामीण शाम चार बजे तक भड़क गए और थाने में ही शव को रखकर धरने पर बैठ गए। इस दौरान ग्रामीण एंबुलेंस समेत सभी को अंदर ले गए। इस बीच ग्रामीण और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई। जब काफी देर तक कोई सुनवाई नहीं हुई तो ग्रामीण और परिजन बोले कि चलो यहां से गांव में चलकर हाईवे जाम करेंगे, तभी पुलिस सुनेगी।
रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई तो धरने पर बैठे
संजय की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने परिजनों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं किया। पुलिस पांच नामजद आरोपियों में से एक नाम कम करने का परिजनों पर दबाव बना रही है। इससे गुस्साए परिजनों ने थाने के अंदर एंबुलेंस में रखे शव को लेकर हंगामा किया। परिजनों की मांग है कि जब तक मुकदमा दर्ज नहीं होगा वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।
सीओ को 10 मिनट का दिया समय
धरने पर बैठे संजय के परिजन और ग्रामीण थाने पर ही भड़क गए। शाम को पांच बजे के करीब उन्होंने सीओ दौराला से वार्ता करने के बाद कहा कि आपके पास 10 मिनट का समय है। अगर 10 मिनट में पांचों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई तो हम शव को थाने में ही आग लगा देंगे और सड़क जाम कर देंगे। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस दबाव में है। हमारा निर्दोष आदमी मर गया और अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। परिजनों के दवाब के बाद आखिर शाम को पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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