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अधिवक्ता आत्महत्या मामले में नया मोड़, नामजद आरोपी ने दी जान, सुसाइड नोट में लिखी ये बड़ी बात

Thu, 18 Feb 2021 06:28 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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थाने में धरने पर बैठे ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ में अधिवक्ता की आत्महत्या के मामले में नया मोड़ आ गया है। इस मामले में नामजद आरोपी दादरी निवासी संजय ने बुधवार रात में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। वहीं गुरुवार को पुलिस ने संजय के घर से एक सुसाइड नोट बरामद किया है। सुसाइड नोट में उसने पांच लोगों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

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संजय का शव बुधवार देर रात दादरी गांव के जंगल में ट्यूबवेल पर लटका हुआ मिला था। परिजन और पुलिस रात से ही सुसाइड नोट की तलाश कर रही थी। वहीं गुरुवार दोपहर में घर पर डायरी में एक पन्ने का सुसाइड नोट मिला। सुसाइड नोट में उसने अपने जीवन को खत्म करने की पूरी कहानी लिखी है। 14 लाइन के सुसाइड नोट में संजय ने लिखा मैं संजय मोतला पुत्र चतर सिंह अपनी जिंदगी में पिछले तीन-चार दिन से बहुत तंग हो चुका हूं। मुझे लव कुमार पुत्र ओमकार, दिवेश पुत्र ओमकार, दिव्या उर्फ गुड्डू पुत्र शिवकुमार, अशोक पुत्र निर्भय, शिव कुमार पुत्र अमीचंद ने मानसिक और सामाजिक रूप से बहुत परेशान कर रखा है।

मुझे और मेरे परिवार को जान से मारने की धमकी इन लोगों की तरफ से लगातार मिल रही है। मेरे जीने के लिए कोई रास्ता नहीं बचा है, इन लोगों से परेशान होकर मैं आत्महत्या के लिए मजबूर हूं, मेरी मौत की जिम्मेदारी इन सभी लोगों की है, अब मैं अपनी जान दे रहा हूं। मैं अपने मां-बाप, पत्नी और बच्चे से माफी चाहता हूं। संजय ने यह सब बातें सुसाइड नोट में लिखी है। सुसाइड नोट पुलिस को दे दिया गया है, पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी है।
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फोन पर अपने भाई से यह बोला संजय
संजय ने मरने से पहले अपने भाई सुशील को रात में 8:30 बजे फोन किया था। संजय ने अपने भाई सुशील से फोन पर पांच लोगों के नाम बताकर अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया, उसने कहा यह लोग मुझे बार-बार मारने की धमकी दे रहे हैं। उन्होंने अपने भाई से कहा मैं आत्महत्या रहा हूं। मेरे बच्चों को अपने बच्चे समझकर रख लेना। इतना कहकर फोन काट दिया। इसके बाद संजय ने काफी देर तक फोन मिलाया, लेकिन बात नहीं हो पाई। जंगल में जाकर देखा तो वह फांसी के फंदे पर लटका हुआ था।

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सुबह से रिपोर्ट के इंतजार में ग्रामीण शाम चार बजे तक भड़क गए और थाने में ही शव को रखकर धरने पर बैठ गए। इस दौरान ग्रामीण एंबुलेंस समेत सभी को अंदर ले गए। इस बीच ग्रामीण और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई। जब काफी देर तक कोई सुनवाई नहीं हुई तो ग्रामीण और परिजन बोले कि चलो यहां से गांव में चलकर हाईवे जाम करेंगे, तभी पुलिस सुनेगी।
 
रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई तो धरने पर बैठे
संजय की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने परिजनों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं किया। पुलिस पांच नामजद आरोपियों में से एक नाम कम करने का परिजनों पर दबाव बना रही है। इससे गुस्साए परिजनों ने थाने के अंदर एंबुलेंस में रखे शव को लेकर हंगामा किया। परिजनों की मांग है कि जब तक मुकदमा दर्ज नहीं होगा वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।

सीओ को 10 मिनट का दिया समय
धरने पर बैठे संजय के परिजन और ग्रामीण थाने पर ही भड़क गए। शाम को पांच बजे के करीब उन्होंने सीओ दौराला से वार्ता करने के बाद कहा कि आपके पास 10 मिनट का समय है। अगर 10 मिनट में पांचों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई तो हम शव को थाने में ही आग लगा देंगे और सड़क जाम कर देंगे। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस दबाव में है। हमारा निर्दोष आदमी मर गया और अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। परिजनों के दवाब के बाद आखिर शाम को पुलिस ने पांच आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

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