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Meerut: फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों की जीएसटी चोरी का आरोपी आबूलेन से गिरफ्तार, आरा मशीन का है संचालक

Wed, 25 Mar 2026 11:57 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

ब्रह्मपुरी और गंगानगर थाने में जीएसटी चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसके बाद पुलिस ने जांच की तो डेढ़ करोड़ की चोरी सामने आई, रकम बढ़ने की आशंका है। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने आरोपी सर्वांग जैन को पकड़ लिया। 
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गिरफ्तारी। सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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क्राइम ब्रांच की टीम ने बुधवार को फर्जी फर्म से कई करोड़ की वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) चोरी के आरोप में सदर बाजार निवासी सर्वांग जैन को आबूलेन से गिरफ्तार किया है। क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी का कहना है कि आरोपी ने फर्जी फर्म बनाकर 20 से अधिक कंपनियों से लेन-देन दिखाया। 1.5 करोड़ की जीएसटी चोरी पुष्टि हो गई है, जांच अभी जारी है। ये रकम कई गुना अधिक होने की आशंका है।
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राज्य कर अधिकारी रेखा रानी ने नंवबर 2025 में गंगानगर थाने में और 4 नवंबर 2025 को राज्य कर अधिकारी राजीव श्रीवास्तव ने ब्रह्मपुरी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जीएसटी चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। क्राइम ब्रांच के निरीक्षक कुलदीप चौधरी ने मामले की जांच की। जांच के बाद इस मामले में सर्वांग जैन को गिरफ्तार किया गया। सर्वांग जैन की आबूलेन पर आरा मशीन बताई गई है। 
 

आरोप है कि सर्वांग जैन ने इस मामले में अपने साथियों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से फर्जी फर्म से बीस कंपनियों से लेन-देन दर्शाया। फर्जी बिल तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया। वस्तु एवं सेवा कर विभाग ने आरोपी को लगभग 50 नोटिस भेजे थे। उसने किसी भी नोटिस का जवाब नहीं दिया था। इसके बाद यह कार्रवाई की गई है।
 

फर्जी निर्यात दिखाकर भी लिया जीएसटी रिफंड
आरोपी ने फर्जी निर्यात दिखाकर जीएसटी रिफंड लिया। फर्जी बिल बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया। फर्जी आधार और स्थायी खाता संख्या कार्ड से कंपनियां बनाई गईं। टैक्स क्रेडिट का गलत इस्तेमाल हुआ। यह जमा नहीं किया गया था। वस्तु एवं सेवा कर रिटर्न में कम बिक्री दिखाकर टैक्स कम भरा गया। गलत एचएसएन कोड का उपयोग कर कम टैक्स वाला कोड इस्तेमाल किया गया। फर्जी ई-वे बिल भी तैयार किए गए। इसके अलावा बिचौलिया नेटवर्क के जरिये फर्जी बिल देकर कंपनियों के बीच केवल कागजी लेन-देन किया।




 
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जांच में अस्तित्वहीन मिलीं फर्म
पूर्व में दर्ज की गईं प्राथमिकियों में आरोप लगाया था कि आरोपी से जुड़ी ओम एंटरप्राइजेज और शाइन एंटरप्राइज जैसी अस्तित्वहीन फर्मों द्वारा धोखाधड़ी की गई है। ओम एंटरप्राइजेज ने वर्ष 2019-20 और 2020-21 में 8.13 लाख रुपये और 37.10 लाख रुपये का बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया। मनीषा अग्रवाल द्वारा पंजीकृत यह फर्म अस्तित्वहीन पाई गई थीं। शाइन एंटरप्राइज ने भी फर्जी पंजीकरण कराकर बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया। सैफ उर रहमान द्वारा पंजीकृत यह फर्म भी अस्तित्वहीन घोषित की गई थी। 
मुख्यमंत्री ने सात जून 2025 को ऐसी फर्जी फर्मों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद गंगानगर थाने में मनीषा अग्रवाल और ब्रह्मपुरी थाने में सैफ उर रहमान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और जांच में सर्वांग जैन का नाम सामने आया।
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