अधीक्षण अभियंता राजीव कुमार ने बताया कि चंदसारा, जुर्रानपुर, शाकरपुर, बाजौट, जाहिदपुर, ततीना सानी, सलेमपुर, गगोल, नरहेड़ा, ढिकौली, गांव की 1500 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। किसानों से समझौते के आधार पर जमीन ली जाएगी। इसके लिए किसानों से लगातार वार्ता की जा रही है, काफी किसान राजी हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेस-वे या सड़क के लिए थोड़ी जमीन की आवश्यकता होती है, जबकि टाउनशिप के लिए काफी जमीन की आवश्यकता होगी। ऐसे में जमीन की दर की दोगुना कीमत ही आवास विकास देगा।
हर ओर होगी कनेक्टिविटी
जहां नई टाउनशिप का प्रस्ताव तैयार किया गया है, वह क्षेत्र अब शहर की सीमा के भीतर ही आने लगा है। गंगा एक्सप्रेस वे का तीस फीसदी काम पूरा हो चुका है। इसके बन जाने के बाद मेरठ से प्रयागराज छह घंटे में पहुंच सकेंगे। आने वाले समय में गंगा एक्सप्रेस-वे और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे को भी जोड़े जाने की तैयारी है। उधर, दूसरी ओर मेडा भी इनर रिंग रोड के तहत दिल्ली रोड को एनएच-58 से जोड़ रहा है। इसके लिए 51 करोड़ की डीपीआर भी तैयार कर ली गई है।
मेडा की टाउनशिप से 1.85 लाख को मिलेगा आशियाना
मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) की परतापुर-मोहिउद्दीनपुर में प्रस्तावित न्यू टाउनशिप में एक लाख 85 हजार लोगों को आशियाना मिलेगा। प्राधिकरण की ओर से शासन में दिए गए प्रजेंटेशन में बताया गया कि इसमें 41 हजार परिवार रह सकेंगे।
परतापुर-मोहिउद्दीनपुर के बीच 142 हेक्टेयर में प्रदेश की पहली इंटीग्रेटेड टाउनशिप के लिए शासन 503 करोड़ रुपए के बजट की मंजूरी दे चुका है। मिश्रित भू उपयोग के कारण न केवल न्यू टाउनशिप में रिहाइश होगी बल्कि व्यवसायिक, औद्योगिक, शैक्षिक गतिविधियां भी होंगी। ऐसे में जहां एक लाख 85 हजार परिवार रह सकेंगे तो वहीं ढाई लाख लोग काम भी करेंगे।