क्लीनिकों में बने मेडिकल स्टोर बंद, नहीं मिल रहीं दवाएं
मेरठ। लॉकडाउन के दौरान सरकार ने दवाओं की बिक्री के लिए छूट दे रखी है। इसके बावजूद लोग दवाएं नहीं मिलने से परेशान हैं। कुछ निजी चिकित्सकों द्वारा लिखी गई दवाएं उन्हीं के क्लीनिक पर बने मेडिकल स्टोर पर मिलती हैं, लेकिन उन मेडिकल स्टोर के बंद होने से लोग दवाओं के लिए भटक रहे हैं।
लॉकडाउन में अधिकतर निजी डॉक्टरों के क्लीनिक बंद हैं। क्लीनिक के साथ उनके मेडिकल स्टोर भी बंद हैं। शहर के कई बड़े डॉक्टर तो अस्पताल भी नहीं जा रहे हैं। फोन के माध्यम से अधीनस्थों को निर्देशित कर रहे हैं। ज्यादातर बड़े डॉक्टर जो दवा लिखते हैं, वह उनकी क्लीनिक के मेडिकल स्टोर में ही मिलती है। ऐसे में मरीज परेशान हैं। जबकि गाइडलाइन के मुताबिक मेडिकल स्टोर खुलने चाहिए। कई बार संबंधित दवा का साल्ट भी नहीं मिलता।
दवा का नाम नहीं साल्ट देखें
आईएमए अध्यक्ष डॉ. नवीन शर्मा का कहना है कि मेडिकल स्टोरों को खोला जाना चाहिए। कुछ क्लीनिक के अंदर बने मेडिकल स्टोर खुल भी रहे हैं। अगर कोई मेडिकल स्टोर बंद है तो दूसरी जगह से दवा खरीद लें। मरीज संबंधित साल्ट वाली दवा का प्रयोग कर सकता है। ब्रांडेट दवा के चक्कर में ना पड़ें।
भ्रम में पड़ जाते हैं मरीज
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री रजनीश कौशल ने बताया कि परेशान मरीज खैरनगर आते हैं। वह ब्रांडेड दवा की मांग करते हैं। साल्ट वाली दवा लेने से इनकार कर देते हैं। चिकित्सकों के क्लीनिक पर मिलने वाली दवा का कॉन्बिनेशन चिकित्सक खुद तैयार कराते हैं। ऐसे में मरीज भ्रम में पड़ जाता है।
आईएमए से करेंगे बात
सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि मेडिकल स्टोरों को खोले जाने की अनुमति है। टेलीमेडिसिन के जरिए चिकित्सक मरीजों को परामर्श दे रहे हैं। उनकी दवा भी मरीजों को मिलनी चाहिए। अगर परेशानी हो रही है तो इस संबंध में आईएमए के अधिकारियों से वार्ता की जाएगी।
नहीं मिल रहीं कई दवाएं
रुड़की रोड गंगोत्री में रहने वाले एसबीआई के मैनेजर हरीश वाधवा का कहना है कि वह अपनी मां की दवाइयों को लेकर काफी परेशान हैं। चिकित्सक ने जो दवाएं लिखी हैं, वह नहीं मिल रही हैं। अधिकांश दवाएं क्लीनिक के मेडिकल स्टोर पर ही मिलती हैं। कई दवाओं का तो साल्ट भी नहीं मिल रहा है। उनकी मां शुगर, ब्लड प्रेशर और थायराइड की मरीज हैं।
साल्ट के आधार पर मिली दवा
यशोदा कुंज निवासी शिक्षिका सायमा का कहना है कि उनकी रीढ़ की हड्डी और पैर में दर्द की शिकायत है। जिस चिकित्सक से इलाज चल रहा था, उन्होंने जो दवाइयां लिखीं, उनमें से कई शहर में तलाशने के बाद भी नहीं मिलीं। साल्ट के आधार पर कुछ दवाएं दूसरे नाम से मिलीं। क्लीनिक का मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण दवाएं मिलने में दिक्कत है।