फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अभी फाइलों में ही कैद है गरीबों को मिलने वाली सरकारी खाद्यान्न किट

विज्ञापन
विज्ञापन
अभी फाइलों में ही कैद है गरीबों को मिलने वाली सरकारी खाद्यान्न किट
विज्ञापन

मेरठ। शहर व देहात में कोई व्यक्ति भूखा न सोए, इसके लिए सरकार राज्य आपदा मोचक निधि से पका व सूखा भोजन उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन को धनराशि जारी करती है। इतना ही नहीं, प्रत्येक परिवार को कितना और किस प्रकार राशन दिया जाना है, उसकी भी सूची निर्धारित कर दी है। शासनादेश जारी किए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी जनपद में इस शासनादेश पर अमल होता नहीं दिख रहा है।
दो सप्ताह से महानगर में भोजन बनाने के लिए प्रशासन रसोई तो चला रहा है, लेकिन बगैर राशन कार्ड धारक बेघर व्यक्ति, प्रवासी श्रमिक लॉकडाउन के कारण फंसे हुए व्यक्ति व राहत कैंप और अन्य स्थलों पर शरण लिए हुए व्यक्तियों को राहत राशि के रूप में सामग्री नहीं मिली है। हालांकि, अभी तक सामाजिक संस्थाएं ही ऐसे गरीब परिवारों के घर पहुंचकर खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में जुटे हुई है।
विज्ञापन

सरकार की खाद्य सामग्री किट
आटा पांच किलो, चावल पांच किलो, दाल अरहर या उड़द या मूंग या मसूर एक किलोग्राम, रिफाइंड या सरसों का तेल एक लीटर, नमक एक किलो, हल्दी 200 ग्राम, धनिया 200 ग्राम, लाल मिर्च 200 ग्राम और आलू तीन किलो किट में रखा जाएगा।
विज्ञापन

गरीब को दो टाइम देना होगा पका भोजन
प्रदेश के अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार द्वारा जारी शासनादेश के मुताबिक प्रत्येक ऐसे व्यक्ति या परिवार जिनके पास राशन कार्ड नहीं हैं या फिर सड़क किनारे प्रवासी श्रमिक आदि को प्रतिदिन तो टाइम का संपूर्ण भोजन दिया जाएगा, जिसमें एक सब्जी, एक दाल, रोटी अथवा पूरी, चावल आदि की व्यवस्था होगी। इसके साथ-साथ रसोई में काम करने वाले प्रत्येक कर्मचारी का चिकित्सा परीक्षण समय-समय पर कराया जाएगा। शासनादेश के मुताबिक, जिला प्रशासन महानगर के किसी व्यक्ति, संस्थान अथवा सामाजिक संस्था व राशन डीलरों पर सरकारी रसोई अथवा किट को लेकर दबाव नहीं बना सकेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें