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मेडिकल में मासूमों की सांस पर वसूली   

Sun, 01 May 2016 02:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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medical - फोटो : amar ujala
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ऑडिट के दौरान जब लेखा परीक्षकों ने
ऐसी एक फर्जी रसीद पकड़ी तो पूरा गोलमाल सामने आने में देर नहीं लगी। ऑडिटरों द्वारा इसे वित्तीय फर्जीवाड़ा करार देने के बाद कॉलेज प्रशासन की शासन स्तर तक मुश्किलें बढ़ गई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता ने सारे मामले पर संबंधित विभाग को पत्र लिखकर जांच रिपोर्ट तलब कर ली है। 
मामला मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग से जुड़ा है। जहां पर कॉलेज व अस्पताल प्रशासन की बिना किसी स्वीकृति के वेंटिलेटर चार्ज वसूलने का मामला सामने आया है। ऑडिट टीम जब फाइलों को खंगाल रही थी तो उसे एक फाइल में रसीद मिली।
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जिसके बाद अफसरों ने कॉलेज प्रशासन से पूछा कि इस तरह की रसीद के माध्यम से जुटाया जा रही धनराशि किस खाते में जमा होती है। कॉलेज प्रशासन ने कहा कि हमारी तरफ से ऐसी कोई रसीद जारी ही नहीं की गई है। 

रसीद नंबर 1470
ऑडिट टीम ने जो रसीद पकड़ी, उसका सीरियल नंबर 1470 है। अफसरों का मानना है कि यानी इससे पहले 1469 मरीजों से छह सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वेंटिलेटर चार्ज वसूला जा चुका है। यह भी माना जा रहा है कि पता नहीं इससे पहले या इसके बाद कितनी रसीद बुक खत्म की जा चुकी होंगी। हालांकि 1470 नंबर के हिसाब से 8.82 लाख रुपये का गोलमाल होना मान चुके हैं। 

नाम में भी गोलमाल
यह रसीद लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के नाम से प्रिंट है। जबकि कॉलेज प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में जहां कहीं भी यूजर चार्ज लिया जाता है तो वहां पर रसीद सरदार बल्लभ भाई पटेल चिकित्सालय के नाम से प्रिंट की जाती है।
ऐसे में ऑडिट टीम ने सवाल किया कि किसी विभाग में पैसा तो लिया जा रहा है, क्योंकि रसीद आप ही की फाइलों से मिली है। इस पर कॉलेज प्रशासन ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि बाल रोग विभाग में वेंटिलेटर चार्ज लिया जा रहा है जिसके लिए रसीद काटी जा रही है।  

न खाता, न बही और न ही अनुमति  
मेडिकल कॉलेज में अगर कोई विभाग यूजर चार्ज वसूलता है तो उसके लिए सीएमएस के माध्यम से प्रस्ताव प्राचार्य को भेजना होता है। इसके बाद कॉलेज की एक  कमेटी जरूरत के हिसाब से न्यूनतम यूजर चार्ज तय करती है और फिर मरीजों से चार्ज लेने संबंधी प्रस्ताव पर मुहर लगाती है, लेकिन वह भी कुछ शर्तों के साथ।
जितना भी पैसा यूजर चार्ज के नाम पर लिया जाता है, उसके एक सरकारी खाते में जमा किया जाना है। जिसकी जानकारी प्राचार्य कार्यालय को देने होगी। ताकि खाते का सालाना ऑडिट हो सके। कमेटी की स्वीकृति के बाद सीएमएस कार्यालय संबंधित विभाग को अस्पताल के नाम की रसीद प्रिंट कराकर देता है। अब बाल रोग विभाग द्वारा यूजर चार्ज के नाम पर ली जा रही रकम को लेकर ना कोई स्वीकृति ली गई और ना ही विभाग ने किसी खाते में जमा किया।
क्योंकि प्राचार्य द्वारा जारी पत्र के जवाब में विभाग ना उस एकाउंट नंबर को बता पाया है, जिसमें धनराशि जमा की जा रही हो और ना ही यूजर चार्ज को लेकर कोई स्वीकृति पत्र दे पाया है। 
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वेंटिलेटर का कोई चार्ज तय नहीं
प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता ने बताया है कि बाल रोग विभाग में अभी तक वेंटिलेटर के कोई यूजर चार्ज तय नहीं हैं। ऐसी सूरत में अभी तक वेंटिलेटर के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता है। कॉलेज की तरफ से कोई यूजर चार्ज तय करने के बाद ही संबंधित विभाग उसे मरीजों से लेने का अधिकारी होगा। 

 
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