मेडिकल कॉलेज में केवल चुनिंदा मरीजों को ही एक्सरे सुविधा मिल पा रही है। कारण करोड़ों रुपये की एक्सरे मशीन कूड़ा हो चुकी हैं। पुरानी मशीनों में केवल एक ही चालू हैं, जो कब बंद हो जाए इसकी भी गारंटी नहीं। वहीं नई मशीनें तो खरीद ली गईं। लेकिन अभी तक भी वे शोपीस बनी हैं। शुक्रवार को काफी संख्या में मरीजों का एक्सरे नहीं हो पाया। केवल इमरजेंसी से आने वाले करीब 13 मरीजों का ही एक्सरे हुआ। जबकि यहां रोजाना औसतन सौ से ज्यादा मरीजों का एक्सरे होता है।
रेडियोलॉजी विभाग के लिए दो मशीन करीब डेढ़ महीने पहले दी गईं। जिसमें एक पोर्टेबल मशीन भी शामिल है। लेकिन अभी तक उन मशीनों को स्टॉल नहीं किया गया है। जिस कारण से एक्सरे पर ब्रेक लग गया है। एक्सरे टेक्नीशियन पहले से कह चुके हैं कि अभी तक संचालित एकमात्र पुरानी मशीन भी सही कंडीशन में नहीं है, जो किसी भी समय बंद हो सकती है।
मशीन की हालत पतली होती देख बीते करीब चार दिनों से सिर्फ इमरजेंसी व बेहद जरूरी मरीजों का एक्सरे किया जा रहा है। बाकी ओपीडी के जरिये आने वाले मरीजों को लौटाया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में एक दिन के अंदर 100 से 125 एक्सरे करने का औसत है, जो संख्या मशीन खराब होने के कारण घटकर प्रतिदिन 15 से भी कम रह गई है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितनी बड़ी संख्या में रोजाना लोग एक्सरे ना होने के कारण बिना इलाज मिले ही लौट रहे हैं।
उधर, रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. यासमीन उस्मानी का कहना है कि नई एक्सरे मशीनों को स्टॉल करने में दिक्कत आ रही है। टेक्नीशियन का कहना है कि उसे उचित अर्थ नहीं मिल पा रहा है, जिस कारण से मशीन को चालू करने में दिक्कत आ रही है। दो चार दिनों में समस्या को सुलझा लिया जाएगा।