मेडिकल कॉलेज में अब ऐसी लैब क्लास के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है, जिसमें जांच करते समय टेक्नीशियन के वायरस की चपेट में आने का खतरा नहीं होगा। एयर प्रेशर पर संचालित होने वाली लैब में कीटाणुओं को बाहर फैलने से रोकने की क्षमता होगी। राज्य सरकार ने लैब के निर्माण संबंधी 3.68 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया है। माइक्रो बायोलॉजी विभाग के लिए इस लैब को संचालित किया जाना है।
अपर मुख्य सचिव डॉ. अनिता भटनागर जैन ने लैब का निर्माण संबंधी बजट जारी करने का आदेश जारी किया है। प्री फैब्रीकेटेड बायोसेफ्टी लैबोरेटरी क्लास (बीएसएल) के निर्माण का जिम्मा आवास एवं विकास परिषद को सौंपा गया है। मेडिकल कॉलेज में माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित गर्ग का कहना है कि लैब में सैंपल की जांच के दौरान वायरल वाले कीटाणुओं के फैलने की संभावना कहीं ज्यादा रहती है। ऐसे में लैब की टीम भी उसकी चपेट में आ सकती है। लेकिन अगर लैब में कई ऐसी सुविधायें दे दी जाएं, जिसके जरिये कीटाणु सैंपल बॉक्स से बाहर निकलें तो उसे फैलने से रोका जा सके तो जांच करने में आसानी होगी। इस लैब से न केवल जांच करने की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि बड़ी रिसर्च करने में भी आसानी होगी। क्योंकि कुछ सैंपल की जांच करने में खासी सावधानी बरतनी पड़ती है।