मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को दिन भर चले हंगामे के बाद देर शाम एक सदस्यीय मजिस्ट्रेटी जांच कमेटी गठित होने के आदेश हो गए। इसके साथ ही चार दिनों से चल रही एमबीबीएस इंटर्न की भूख हड़ताल भी समाप्त हो गई।
प्राचार्य ने इस संबंध में एडीएम (सिटी) से मुलाकात की थी। अब अपर जिला मजिस्ट्रेट डीपी श्रीवास्तव संजीत के इलाज में बरती गई लापरवाही की जांच करेंगे।
बता दें कि इससे पहले मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा अलग से जांच कमेटी गठित हो चुकी है। जिसमें पांच सदस्य कॉलेज से हैं तो डीएम ने जिला प्रशासन की तरफ से एसीएम रितु पूनिया को नामित किया था।
गौरतलब है कि मूल रूप से सहारनपुर निवासी एमबीबीएस इंटर्न संजीत सिंह की विगत 12 फरवरी को मेडिकल कॉलेज में समय से इलाज न मिलने पर मौत हो गई थी।
संजीत के इलाज में लापरवाही बरतने वाले जूनियर और सीनियर डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग को लेकर इंटर्न छात्र ऋषिकेश सिंह, शोभित त्यागी, सौरभ अहलावत, मनोज कुमार और विवेक कुमार मेडिकल कॉलेज कैंपस में चार दिनों से भूख हड़ताल पर थे। जबकि करीब 150 इंटर्न उन्हें सपोर्ट कर रहे थे।
संजीत की मौत के प्रकरण के बाद से मेडिकल कॉलेज प्रशासन चौतरफा दबाव में था। जूनियर डॉक्टर जहां केवल जरूरी वार्डोँ में ही सेवाएं दे रहे थे। जिससे मेडिकल अस्पताल की चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो रही थीं। कॉलेज प्रशासन ने दो दिन पूर्व ही जो जांच समिति गठित की थी, उससे ये छात्र सहमत नहीं थे।
वहीं, ईएमओ डॉ. सचिन को सस्पेंड करने के आदेश पर भी खासे नाराज थे। बृहस्पतिवार को कुछ जूनियर डॉक्टरों ने इंटर्न छात्रों के बीच जाकर वार्ता की कोशिश की थी तो इंटर्न ने उन्हें आइना दिखा दिया था।
मजिस्ट्रेटी जांच होना जरूरी
हंगामे के बीच कालेज प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता, ईएमओ डॉ. अजीत चौधरी एमबीबीएस के तीन छात्रों को साथ लेकर शुक्रवार दोपहर एडीएम सिटी एसके दूबे से मिले। प्राचार्य ने लिखित तौर पर मांग की कि संजीत को समय पर इलाज ना मिल पाने के कारण हुई मौत से जुड़े सारे बिंदुओं की मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाये।
इसके बाद प्राचार्य कालेज लौटे तो विवि के छात्रों ने काफी हंगामा किया। जिसमें काफी तीखी बहस भी हुई। छात्र मजिस्ट्रेटी जांच के साथ ही 12 जेआर और एचओडी मेडिसन को सस्पेंड कराने पर अड़े थे। हालांकि देर शाम डीएम पंकज यादव की तरफ से आदेश जारी हो गया।
जिसमें इस प्रकरण की जांच के लिए एडीएम डीपी श्रीवास्तव को नियुक्त करने की बात कही गई। उधर, ईएमओ डॉ. सचिन ने अपने सस्पेंशन पर कहा है कि डॉ. संजीत की मौत पर मुझे दुख है। लेकिन उनकी मौत के बाद कॉलेज में जो राजनीति हुई है, वह भी काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। कॉलेज प्राचार्य ने मुझे सस्पेंड किया है। जो मुझे स्वीकार है। मुझे भरोसा है कि मेरे साथ न्याय होगा।
नहीं सोचे थे ये दिन
भूख हड़ताल पर बैठे इंटर्न के बीच जाकर कॉलेज प्रशासन ने जब डीएम के मजिस्ट्रेटी जांच गठित करने संबंधी आदेश की जानकारी दी तो इंटर्न ने कहा कि हमें नहीं पता था कि हमें अपने ही साथी को गंवाना पड़ेगा और फिर न्याय पाने के लिए भूख हड़ताल पर बैठना पड़ेगा। मजिस्ट्रेटी जांच से सब कुछ साफ हो जाएगा।
अब पूरे प्रकरण की मजिस्ट्रेट जांच हो रही है। जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हमारी कोशिश यह है कि हर मरीज को इलाज मिले, इसलिए सारे निर्णय छात्र, जेआर और सीनियर फैकल्टी की राय व उनको साथ लेकर लिए गए हैं। -डॉ. केके गुप्ता, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज