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मेडिकल कॉलेज में हड़ताल से मरीज कराहे

Wed, 01 Jun 2016 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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मेडिकल कॉलेज में हड़ताल - फोटो : अमर उजाला
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लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को यूपीपीजीएमईई काउंसलिंग में प्रांतीय चिकित्सा संवर्ग के चिकित्सकों को वेटेज दिए जाने के विरोध में हड़ताल की गई। एमबीबीएस स्टूडेंट्स और जूनियर डॉक्टरों ने पूरे मेडिकल कॉलेज को बंद करा दिया। प्रदर्शनकारी पर्चा काउंटर से लेकर इमरजेंसी तक में धरने पर बैठे रहे। घंटों तक इंतजार करने के बाद ओपीडी में आए मरीज वापस लौट गए। उधर, इमरजेंसी में भी हालत विकट रहे। किसी भी मरीज के आने पर प्रदर्शनकारी सरकार विरोधी नारे लगाने लगते थे।  
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  सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूपीपीजीएमईई 2016 की दोबारा काउंसिलिंग की गई है। इसमें प्रांतीय चिकित्सा संवर्ग के चिकित्सकों को 30 फीसदी का वेेटेज दिया जा रहा है। इसे लेकर एमबीबीएस कर चुके मेडीकोज में नाराजगी है। उनका मानना है कि इससे तमाम सीटें प्रांतीय चिकित्सा संवर्ग को मिल जाएंगी। इसी मुद्दे पर किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ (केजीएमयू) में विरोध जताया जा रहा है। मंगलवार को मेरठ मेडिकल कॉलेज में भी हड़ताल की। एमबीबीएस स्टूडेंट्स और जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी बंद कराने का प्रयास करते हुए हंगामा किया। ईएमओ डॉ. अजीत चौधरी और डॉ. सचिन ने कहा कि किसी भी हाल में इमरजेंसी चिकित्सा सेवा प्रभावित नहीं होने दी जाएंगी। उधर, सभी प्रदर्शनकारी इमरजेंसी बंद कराने पर अड़ा रहे। इस पर काफी तनातनी हो गई। छात्र और जूनियर डॉक्टर इमरजेंसी गेट में हड़ताल पर बैठ गए।
 
सरकार विरोधी जुलूस निकाला
इमरजेंसी के बाद जूनियर डॉक्टरों ने सरकार विरोधी जुलूस निकाला। इस दौरान ईसीजी से लेकर बच्चा वार्ड, एक्सरे से लेकर तमाम वार्डों को बंद करना शुरू करा दिया। जूनियर डॉक्टरों ने पर्चा काउंटर पर ताला लगा दिया और फर्श पर ही धरने पर बैठ गए। इसी बीच कुछ डॉक्टरों ने बाकी ओपीडी भी बंद करा दिया।  
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इलाज के लिए तरसे मरीज
हड़ताल के बीच मरीज इलाज के लिए तरसते रहे। इमरजेंसी में मरीजों को जाने से रोका गया। ईएमओ के कहने पर डॉक्टरों ने मरीजों को अंदर जाने दिया, लेकिन एंबुलेंस से लाये गए मरीजों को अंदर तक जाने के लिए व्हील चेयर और स्ट्रेचर की सुविधा नहीं मिली। तीमारदार अपने मरीजों को कंधों पर डालकर भर्ती कराने पहुंचे।
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कई फैकल्टी भी नदारद रहीं  
हड़ताल जूनियर डॉक्टरों और एमबीबीएस स्टूडेंट्स की थी, लेकिन सीनियर फैकल्टी (डॉक्टर) भी ओपीडी से नदारद रहे। दो-तीन ओपीडी को छोड़कर अधिकांश बंद रही। मेडिसन में डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य अकेले मरीजों को देखने में लगे रहे। जिस मरीज के पास नया पर्चा नहीं था तो उसे पुराने पर्चे पर देखा गया। हड्डी विभाग की ओपीडी में दोपहर 2 बजे तक उन्हीं मरीजों को देखा गया जिन के पास पर्चा था।
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 वर्जन
 हम लोग सिर्फ हक के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। मरीजों को नुकसान पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं है। इसलिए इमरजेंसी सेवाओं को बहाल रखा है। सरकार अगर मांगे नहीं मानती है, तो विरोध जारी रखा जाएगा। - डॉ. अंकित वर्मा (जूनियर डॉक्टर)
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