मेडिकल और जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं का हाल बेहाल है। तस्वीरें खुद व्यवस्था की पोल खोल रही हैं। पानी को लेकर मरीज और तीमारदार तरस जाते हैं। मेडिकल अस्पताल में एक वाटर कूलर लंबे समय से खराब पड़ा है। उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। वहीं, जिला अस्पताल में एक टोंटी ही बंद करा दी गई है।
ओपीडी केसमय चिकित्सक सूचना पट लटका कर चले जाते हैं कि डॉक्टर साहब ऑपरेशन करने गए हैं या कोर्ट गए हैं, आज नहीं मिलेंगे। अव्यवस्था की वजह से दवाइयां लेने के लिए महिलाएं और बुजुर्ग परेशान रहते हैं। एंटी रेबीज इंजेक्शन के लिए मारामारी है और ओपीडी पर्चा काउंटर हो या ओपीडी, दोनों ही जगह कुत्तों का डेरा है। वह आराम फरमाते मिलते हैं। इसके अलावा कभी दवाइयां नहीं मिलती तो कभी समय पर इलाज नहीं मिलता। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी का कहना है कि व्यवस्था को बेहतर करने की कोशिश लगातार की जा रही है। पहले से हालात काफी सुधरे हैं। वहीं, जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल का कहना है कि अस्पताल के सुधार के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। जो कमियां हैं उन्हें भी जल्द दूर कर लिया जाएगा।