मवाना। नगर के विभिन्न स्कूल-कॉलेजों में बृहस्पतिवार को धूमधाम से क्रांति दिवस मनाया गया। इस अवसर पर कॉलेजों में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।
कृषक इंटर कॉलेज में क्रांति दिवस के अवसर पर प्रधानाचार्य देवेंद्र कुमार ने 10 मई 1857 की क्रांति के बारे में छात्र-छात्राओं को विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि क्रांति की चिंगारी मेरठ से सुलगी। डॉ. वीरेंद्र, नरेश पाल, प्रसोत कुमार, संजीव, चंद्रपाल, विजय सिंह, देवेंद्र, पूनम आदि मौजूद रहे। जवाहर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य हरिओम त्यागी ने क्रांति दिवस का शुभारंभ शहीदों के चित्र पर माल्यार्पण करके किया। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने शहीदों की याद में मवाना खुर्द में रैली निकाली और शहीदों की कुर्बानी से लोगों को जागरूक किया। केपी सिंह, अनीता, मीनू, दीपा, निर्दोष कुमार, विशाल कुमार, वरुण देव, महकार सिंह, गौरव, अरविंद आदि मौजूद रहे। बाल भारती पब्लिक स्कूल में शहीद मंगल पांडे को क्रांति दिवस पर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्या मधु गुप्ता ने भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण करके किया। उन्होंने बच्चों को क्रांति दिवस के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रबंधक अभयवीर ने शहीदों के जीवन पर प्रकाश डाला । साहित्य संगम परिषद के तत्वावधान में धूमधाम से क्रांति दिवस मनाया गया। एएस इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य बीके शर्मा ने भारत माता और सुभाष चंद्र बोस के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। नरेंद्र कुमार रस्तोगी के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में श्रीराम मलिक, नरेंद्र कुमार, संजीव कुमार, यशपाल, डा. शशि साहनी आदि मौजूद रहे। वहीं, अखिल भारतीय उपभोक्ता परिषद के तत्वावधान में भी धूमधाम से क्रांति दिवस मनाया गया। मुख्य अतिथि हाजी इरफान रहे। अखिल भारतीय उपभोक्ता परिषद के प्रदेशाध्यक्ष नूर मोहम्मद ने कार्यक्रम में शामिल सदस्यों को बताया कि देश को आजादी दिलाने के लिए शहीदों ने हमारे लिए बलिदान दिया है। हमें उन्हें याद रखना चाहिए। इतना ही नहीं इससे भावी पीढ़ी को भी अवगत कराना चाहिए। यहां प्रभु सैनी, मनोज शर्मा, अहतेशाम अंसारी, महावीर, महेंद्र सैनी, बलराम, अनिल चौधरी आदि मौजूद रहे।
51 फीट की तिरंगा यात्रा निकाली
मवाना। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तत्वाधान में क्रांति दिवस पर 51 फीट की तिरंगा यात्रा निकाली गई। यात्रा नगर के गली और चौराहों से होकर गुजरी। यहां जगह जगह उसका भव्य स्वागत किया गया।
तिरंगा यात्रा का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर सिंह एवं प्रांत संगठन मंत्री महेश राठौर ने किया। इसके बाद भाजपा नेता अमल खटीक ने भारत माता के चित्र की आरती एवं माल्यार्पण कर यात्रा को रवाना किया। तिरंगा यात्रा नगर के सुभाष चौक, फलावदा चौराहा, हस्तिनापुर रोड, तहसील रोड आदि गली और चौराहों से होकर गुजरी। देशभक्ति गीतों पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता जमकर थिरके। तहसील रोड स्थित शहीद चंद्रभान वाटिका पर यात्रा का समापन हुआ। जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश को आजाद कराने के लिए देश के वीरों ने बलिदान देकर देश को आजाद कराया है। उनकी कुर्बानी को नहीं भुलाना चाहिए। उन्होंने आने वाली पीढ़ी को क्रांतिवीरों के बारे में अवगत कराने का आग्रह किया। जिससे देश की सभ्यता एवं संस्कृति जिंदा रहे। कार्यकर्ताओं ने शहीद चंद्रभान को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर शुभम जैन, अजित शर्मा, उज्ज्वल चौहान, विनीत, जितेंद्र, मंथन रस्तोगी, पीयूष वर्मा, अंकुर आर्य आदि मौजूद रहे।
मातादीन ने भरा था जवानों में जोश
दौराला के राष्ट्रीय किसान उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में क्रांति दिवस का आयोजन किया गया। यहां प्रधानाचार्य महेंद्र सिंह ने बताया कि दस मई 1857 को मेरठ की क्रांति धरा से आजादी के लिए संघर्ष का बिगुल बजा था। मातादीन वाल्मीकि की प्रेरणा से हमारे वीर जवानों के अंदर ऊर्जा का स्रोत उत्पन्न हुआ। वाल्मीकि ने बताया था कि जिन कारतूसों को आप मुंह से प्रयोग में लाते हैं। वे जानवरों की चर्बी के बने होते हैं। इससे क्षुब्ध होकर भारतीय जवानों ने अंग्रेजी सेना से विद्रोह कर दिया था। इसमें बहुत से भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए। इसके बाद यह क्रांति दिवस प्रत्येक वर्ष दस मई को मनाया जाता है। इस दौरान रोहित छाबड़ा, केपी सिंह, मनोज कुमार, अमित कुमार, महेंद्र सिंह राणा, दीपक राणा, विवेक शर्मा, अरविंद शर्मा आदि मौजूद रहे।
फलावदा। विद्या संस्कार एकेडमी के प्रांगण में सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश कर छात्र-छात्राओं ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। 1857 में क्रांति की आजादी में शहीद हुए जांबाजों की प्रतिमाओं पर श्रद्धांजलि अर्पित की। स्कूल प्रबंधक कुलदीप सैनी ने बच्चों को क्रांति दिवस के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों की कोई जाति और मजहब नहीं है। उनमें एक जुनून था केवल आजादी जिसे उन्होंने प्राणों की आहुति देकर हासिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके बाद 1947 में कामयाबी भी हासिल हुई। कविता सैनी ने आजादी की लड़ाई में शहीद जांबाजों को श्रद्धांजलि दी। वे सविता, रिंकी, अवली, साक्षी, मीनाक्षी, अजय, पवन, साजमा आदि उपस्थित थे।