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Meerut News: मेडा ने बुलडोजर चलाकर लिया जमीन पर कब्जा

Thu, 14 May 2026 09:53 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
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लोहिया नगर में किसानों से मुक्त कराई जमीन व मौके पर मौजूद विकास प्राधिकरण की टीम और किसान। स्रो
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सपा नेता और मेडा सचिव में तीखी बहस, हंगामा, बुल्डोजर के आगे लेटे किसान
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- लोहिया नगर में बढ़ा प्रतिकर लेने के लिए 10 साल से किसानों का जमीन पर कब्जा
- पुलिस फोर्स की मौजूदगी में मेडा ने ली जमीन
फोटो
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। लोहिया नगर में बृहस्पतिवार को मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने दल-बल के साथ अपनी जमीन पर कब्जा कर लिया। किसानों ने इसका विरोध करते हुए जमकर हंगामा और नारेबाजी की। किसान महिलाओं सहितं जेसीबी के आगे बैठ गए। मेडा सचिव आनंद कुमार और सपा नेता गौरव काजीपुर के बीच जमकर बहस हुई, लेकिन मेडा प्रशासन ने जमीन पर बुल्डोजर चलाकर पुलिस की मौजूदगी में जमीन पर कब्जा ले लिया।
2015 में मेडा ने लोहिया नगर में किसानों से जमीन खरीदी थी। करीब छह बीघा जमीन पर किसानों का कब्जा था। किसानों का कहना था कि मेडा ने बढ़ा हुआ प्रतिकर नहीं दिया। बढ़ा प्रतिकर मिलने के बाद ही वह जमीन को मुक्त करेंगे। इसको लेकर कई बार किसानों से अफसरों की वार्ता हुई। मेडा अफसरों का कहना था कि वे किसानों को जमीन का सारा पैसा दे चुके हैं। यह विवाद करीब दस साल से चल रहा था।
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बृहस्पतिवार को मेडा के सचिव आनंद कुमार, प्रवर्तन अधिकारी अर्पित यादव सहित उनकी टीम जमीन पर कब्जा लेने के लिए पहुंच गए। टीम ने किसानों की फसल पर बुल्डोजर चला दिया। इसकी जानकारी लगते ही सपा नेता गौरव काजीपुर और किसानों के परिवार की महिलाएं मौके पर पहुंच गए और मेडा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बुलडोजर के आगे बैठ गए।
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किसानों के हंगामे का पता लगते ही लोहियानगर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। सपा नेता और मेडा सचिव की तीखी बहस हुई। पुलिस ने सपा नेता को वहां से हटाकर मेडा का जमीन पर कब्जा दिलाया। करीब दो घंटे गहमागहमी का माहौल रहा। मेडा ने जमीन पर कब्जा कर तारबंदी कर ली है। सपा नेता गौरव काजीपुर का कहना है कि मेडा ने मनमानी तरीके से ही जमीन पर कब्जा किया है। किसानों की मांग है कि उनको बढ़ा प्रतिकर मिलना चाहिए, अन्यथा वह किसानों के साथ मेडा के खिलाफ धरना प्रदर्शन करेंगे। किसानों को उनका हक दिलाने का कार्य करेंगे। प्रवर्तन अधिकारी अर्पित यादव का कहना है कि यह जमीन मेडा की है। कई बार किसानों को समझाया गया कि मेडा की जमीन को खाली कर दिया जाए। कुछ लोगों की गुंडागर्दी के जमीन पर कब्जा किया हुआ था, जिसे मुक्त कराया गया है।
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