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मेडा सचिव हटाए: चार माह में ही नपे अर्पित गुप्ता, सेंट्रल मार्केट मामले में लापरवाही पड़ी भारी, ये बोले वीसी

Wed, 23 Sep 2026 09:55 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

Meerut News: सुप्रीम कोर्ट में अवैध निर्माण की लिस्ट में लापरवाही पर सचिव अर्पित गुप्ता नप गए। महानगर के जोन-ए में 16726 भवनों की लिस्ट सुप्रीम कोर्ट में दी गई थी। मेडा वीसी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश देखकर जवाब प्रस्तुत करेंगे। 
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अर्पित गुप्ता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट में 16,726 भवन के अवैध निर्माण की सूची में लापरवाही करने पर मेरठ विकास प्राधिकरण के सचिव अर्पित गुप्ता पर बुधवार को गाज गिर गई। उन्हें प्राधिकरण से हटाया गया, नई तैनाती नहीं दी और अभी वह प्रतीक्षारत में हैं। अचानक सचिव पर कार्रवाई होने पर प्राधिकरण में दिनभर अलग-अलग चर्चा रहीं। प्राधिकरण उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना का कहना कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी नहीं मिला है। आदेश सर्वोपरि है और जैसे ही आदेश मिल जाएगा, उसकी समीक्षा कर आगे की रणनीति बनाकर जवाब प्रस्तुत करेंगे। सभी पहलुओं को देखा जा रहा है।
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शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण ध्वस्त करने का सिलसिला जारी है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई थी। उसी दिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मेरठ में थे। मेरठ विकास प्राधिकरण के सचिव ने शहर के ए-जोन की सूची प्रस्तुत की। इसमें 16,726 हजार भवन मानचित्र के आधार पर न होना बताया गया। सुप्रीम कोर्ट ने उक्त भवनों को सील करने के आदेश कर दिए। इसकी जानकारी लगने पर मेरठ में खलबली मच गई।
 

बताया कि सुप्रीम कोर्ट में मौजूद सचिव ने अवैध निर्माण की सूची बताने में लापरवाही की है। उन्होंने स्पष्ट नहीं किया है कि प्राधिकरण के स्थापित होने से पहले वाले निर्माण भी सूची में है। इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी नाराजगी जताई। मंगलवार को सचिव अर्पित गुप्ता लखनऊ में थे। बुधवार को विशेष सचिव लखनऊ ने सचिव को मेरठ प्राधिकरण से हटा दिए। 
 

इस जानकारी पर प्राधिकरण में खलबली मच गई। अर्पित गुप्ता मई 2026 में ही मेरठ प्राधिकरण में सचिव की तैनाती मिली थी। अवैध निर्माण में प्राधिकरण के कौन-कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं। इसकी भी लखनऊ से जानकारी ली जा रही है।
 

अवैध निर्माण की सूची और सीलिंग का खौफ
शहर के जोन-ए में 16.726 हजार भवनों को अवैध निर्माण के तौर पर चिह्नित किया गया है। इन भवनों की सीलिंग के आदेश के बाद से ही बेचैनी का माहौल है। अब जोन बी, सी और डी में भी सर्वे की तैयारी चल रही है। सुप्रीम कोर्ट से आदेश मिलने के बाद शहर के भवन स्वामियों में दहशत का माहौल है। इसको लेकर शहर के लोगों में अलग-अलग चर्चा रही। किसका भवन अब ध्वस्तीकरण की जिद में आएगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश आने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
 
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प्राधिकरण से पहले बने निर्माण पर कैसे होगी कार्रवाई
विकास प्राधिकरण की नियमावली कहती है कि उनके स्थापित (वर्ष 1976) होने के बाद वाले ही निर्माण कार्य उनके दायरे में आते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि मेरठ प्राधिकरण से पहले बने निर्माण कार्य पर कार्रवाई कैसे होगी। इसके बारे में अभी प्राधिकरण के अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। बताया कि प्राधिकरण ने जिन 16726 भवनों को चिह्नित किया है। उनमें से काफी भवन स्वामियों ने अपने आवासीय और व्यावसायिक भवन 50 साल पुराने बताए हैं।

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