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रैपिड के आने और एफएआर में बढ़ोतरी से शहर में बढ़ेंगे बहु मंजिला निर्माण

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मेरठ। उत्तर प्रदेश आवास भवन निर्माण एवं विकास उपविधि 2008 में बदलाव करते हुए बायलॉज-2025 को प्रदेश सरकार मंजूर कर चुकी है। मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) की ओर से इसे अंगीकार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। मंगलवार को रियल एस्टेट डवलपर्स के साथ नए बायलॉज को लेकर उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में बैठक हुई। बिल्डरों ने कहा कि शहर में रैपिड के आने के साथी तेजी से विकास हो रहा है और जमीन कम होती जा रही हैं। ऐसे में फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) में छूट से शहर में बहु मंजिला इमारत के निर्माण में वृद्धि होगी।
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बैठक में प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि नए मामलों में ही राहत दी जाएगी, जिस पर बिल्डरों ने एतराज जताया। उन्होंने कहा कि ऐसी योजना का फायदा फिर आम लोगों को नहीं मिलेगा। एपेक्स ग्रुप के एमडी अतुल गुप्ता ने कहा कि नए बायोलॉज पुराने मामले में भी लागू किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर में 400 निजी कालोनियां हैं, इन्हें नए प्रावधानों के अंतर्गत लाना चाहिए। अतुल गुप्ता ने कहा कि स्टिल्ड पार्किंग और सेटबैक के मामले में छूट से सीधे जनता को लाभ होगा। अजंता डवलपर्स के एमडी उत्कर्ष जैन ने कहा कि रैपिड के आने के साथ ही शहर में विकास की गति बहुत तेज हो गई है। जमीन कम होती जा रही हैं, ऐसे में बहु मंजिला इमारत को एफएआर में छूट से काफी लाभ होगा। उन्होंने बताया कि नए प्रावधानों के अंतर्गत 100 मीटर तक नक्शे पास करने की आवश्यकता नहीं होगी, जबकि 500 मीटर तक के नक्शे आर्किटेक्ट के स्तर से ही स्वीकृत हो जाएंगे। इससे लोगों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी।
रेडा के अध्यक्ष अशोक गर्ग ने कहा कि नए बायोलॉजी नीतिगत बहुत अच्छे हैं। इन पर सुझाव भी मांगे गए हैं। इनके लागू होने से शहर में विकास की रफ्तार को बढ़ावा मिलेगा। रेडा के महामंत्री कमल ठाकुर ने बताया कि पहले जहां अपार्टमेंट के लिए 2000 वर्ग मीटर प्लॉट अनिवार्य था, अब 1000 वर्गमीटर में भी अपार्टमेंट निर्माण की अनुमति मिल सकेगी। साथ ही अस्पताल और कमर्शियल बिल्डिंग के लिए 3000 वर्गमीटर पर्याप्त होगा। 25 प्रतिशत हिस्से में अब नर्सरी, क्रेच, होमस्टे या फिर वकील, डॉक्टर, आर्किटेक्ट, चार्टेड अकाउंटेंट जैसे प्रोफेशनल्स अपने दफ्तर चला सकेंगे।
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इसके लिए नक्शे में अलग से उल्लेख करना जरूरी नहीं होगा। उन्होंने बताया कि नए प्रावधानों से बहुमंजिला निर्माण अब तेजी से होंगे। अब 24 मीटर या उससे चौड़ी सड़क वाले रिहायशी क्षेत्रों में दुकानें और दफ्तर खोले जा सकेंगे। इसके साथ ही वकील, डॉक्टर जैसे प्रोफेशनल्स कम चौड़ाई वाली सड़कों पर भी अपने ऑफिस खोल सकते हैं। बिल्डर सचिन अग्रवाल ने कहा कि अब 45 मीटर चौड़ी सड़क पर किसी भी ऊंचाई की इमारत बनाने की इजाजत मिलेगी। साथ ही फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) भी अब 3 गुना तक बढ़ाया गया है, जो राहत देने वाला कदम है।
उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना ने बताया कि नई उपविधि को लेकर रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन (रेडा) के साथ मंगलवार को बैठक में मंथन किया गया। इसमें नई उपविधि के नियमों पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि नई उपविधि के तहत अब 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय और 30 वर्ग मीटर तक के व्यवसायिक प्लॉट के लिए नक्शा स्वीकृत कराने की जरूरत नहीं होगी। आवेदक को मामूली रजिस्ट्रेशन शुल्क पर अपनी ही जिम्मेदारी पर अनुमति दे दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि 500 वर्ग मीटर तक आवासीय भवन व 200 वर्ग मीटर तक वाणिज्यिक भवन के लिए लाइसेंस प्राप्त तकनीकी व्यक्ति द्वारा खुद तैयार किए गए मानचित्रों पर विश्वास आधारित ऑनलाइन अनुमोदन होगा। उन्होंने कहा कि बिल्डर से आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं। शासन में पैरवी कर इसे लागू कराया जाएगा, जिससे लोगों को राहत मिल सके।
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