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जनपद में चल रहे बिना मानचित्र स्वीकृत मीट प्लांट

Fri, 26 Feb 2016 02:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ
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जनपद में नौ मीट प्लांट का संचालन बगैर मानचित्र स्वीकृति के हो रहा है। एक मीट प्लांट को एनओसी देने के लिए डीएम ने मानचित्र स्वीकृति का प्रमाण पत्र तलब किया, जिसके बाद पूरे मामला का खुलासा हुआ। लेकिन मानचित्र स्वीकृति पर तमाम सवालों के बीच प्रशासन, एमडीए और मीट प्लांट आमने-सामने आ रहे हैं।
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ये है मामला
मीट प्लांट संचालन के लिए प्रदूषण, पशु चिकित्सा, पुलिस आदि विभागों से अनुमति लेनी जरूरी है। इसमें अंतिम एनओसी जिलाधिकारी द्वारा दी जाती है। जनपद में इस समय नौ मीट प्लांट संचालित हैं, जिनमें तीन को कटान की भी सशर्त अनुमति है।

एक मीट प्लांट ने एनओसी के लिए जिलाधिकारी कार्यालय में आवेदन किया, तो मानचित्र स्वीकृति का प्रमाण पत्र मांगा गया। इसके बाद जांच कराई गई, तो पता चला कि एक भी मीट प्लांट के पास एमडीए द्वारा स्वीकृत मानचित्र नहीं है।
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अलफहीम का नहीं हुआ भू परिवर्तन
अलफहीम मीटैक्स कृषि भूमि पर संचालित है। 2 जून 2010 को अलफहीम की तरफ से भू परिवर्तन और मानचित्र स्वीकृति का आवेदन किया गया था। 13 दिसंबर 2010 की बोर्ड बैठक में इस आवेदन को निरस्त कर दिया गया। तब से यह मीट प्लांट अवैध रूप से चल रहा है।

मीट प्लांट संचालन पर उठ रहे सवाल
वर्तमान में सभी मीट प्लांट एमडीए परिक्षेत्र में हैं। 2001 की महायोजना में यह क्षेत्र एमडीए परिधि में आया था। इसके बावजूद आज तक एमडीए ने इन प्लांटों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की।

इसके साथ ही बगैर मानचित्र स्वीकृति के प्रदूषण के साथ ही अन्य विभाग इन मीट प्लांटों को एनओसी कैसे देते रहे, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ये हैं मीट प्लांट
अल आलिया फूड प्रोसेसर्स, अल कैफ इंडस्ट्रीज, अल अक्सा एक्सपोर्ट, अल यासिर, अल जुनैद फूड प्रोडक्ट्स, अल लिमराह फ्रोजन फूड, अदक्स फूड, अल फहीम मीटैक्स, अल साकिब एक्सपोर्ट। इनमें अल जुनैद, अल फहीम और अल साकिब को कटान की भी अनुमति है।
वर्जन.....
एक मीट प्लांट का आवेदन एनओसी के लिए आया था। मानचित्र स्वीकृति पर ही एनओसी दी जा सकती है। दूसरे मीट प्लांट को कैसे अब तक एनओसी मिलती रही, यह मेरे संज्ञान में नहीं है। लेकिन अब जिन्हेें एनओसी चाहिए, उन्हें सभी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। -पंकज यादव, जिलाधिकारी
जिस मीट प्लांट का आवेदन नक्शा स्वीकृति के लिए आया है, वह विचाराधीन है। उसमें कई खामियां हैं। जो मीट प्लांट एमडीए क्षेत्र में आते हैं, उनका नक्शा स्वीकृति की जांच कराई जा रही है। यदि नहीं है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-कुमार विनीत, एमडीए सचिव
मैंने भू उपयोग परिवर्तन और नक्शा स्वीकृति के लिए एमडीए में आवेदन किया था, जो कि नामंजूर हो गया। इसके बाद डीएम के यहां एनओसी के लिए आवेदन किया, लेकिन डीएम साहब नहीं मान रहे। अब फिर से एमडीए में आवेदन किया है। मैं एमडीए अफसरों के सामने अपनी बात रखूंगा। हालांकि तहसील से नक्शा स्वीकृत हो गया था।
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-याकूब कुरैशी, चेयरमैन अलफहीम मीटैक्स
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