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अमर उजाला की खास रिपोर्ट: सोता रहा सिस्टम और कब्जा लिए गए 400 सरकारी आवास

Thu, 10 Jan 2019 10:09 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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डूडा के आवासों पर किया गया कब्जा - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) और डिस्ट्रिक अरबन डेवलपमेंट एजेंसी (डूडा) ने आवास तो बनाए। लेकिन लोगों ने इनमें से अधिकांश पर मुफ्त में ही कब्जा कर लिया। कई योजनाओं में यह खेल चल रहा है। विभागों के ही कर्मचारियों की शह पर यह खेल हुआ और आरोप यह भी हैं कि इन लोगों से कर्मचारी वसूली करते हैं। 

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एमडीए की लोहियानगर योजना में किसानों के साथ प्राधिकरण का पुराना विवाद चलता रहा। किसान अतिरिक्त प्रतिकर की मांग करते रहे और निर्माण कार्य नहीं होने दिए। जब जब भी एमडीए टीम यहां निर्माण कार्य करने पहुंची, इसका किसानों ने विरोध कर दिया और टीम को लौटना पड़ा। बावजूद इसके बीच-बीच में जब-जब समझौते हुए, एमडीए ने यहां मौका देखकर आवास बनाए। पांच सौ आवास बनाए गए हैं। 

खाली घरों का उठाया फायदा
लोहियानगर के एम ब्लॉक, सी ब्लॉक में दुर्बल आय वर्ग श्रेणी के आवासों का निर्माण किया गया। आवंटन भी हुआ। लेकिन काफी आवास ऐसे खाली पड़े जो या तो आवंटित नहीं हुए या किश्त जमा न होने पर उनके आवंटन निरस्त हो गए हैं। इसी का लोगों ने फायदा उठाया और इन आवासों पर लोगों ने कब्जा कर लिया। पहले तो एमडीए को इसका पता ही नहीं चला। लेकिन जब आवंटन करने का नंबर आया और यहां सर्वे किया तो पता चला कि यहां तो कब्जे हैं। केवल एम ब्लॉक में ही ऐसे 34 मकान सामने आए जिनमें से कुछ पहले खाली कराए जा चुके हैं। इतने ही सी ब्लॉक में मकान हैं। फिलहाल इस योजना में किसानों का भी कोई विवाद नहीं है। बावजूद इसके यहां एमडीए सख्ती से काम नहीं कर पा रहा है। बताया जा रहा है कि करीब सौ से ज्यादा आवासों पर कब्जे हैं।

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वीसी ने की फाइलें तलब
एमडीए के वीसी साहब सिंह ने योजनाओं की फाइलें तलब की हैं तो सबसे ज्यादा ऐसे कब्जे लोहियानगर में ही सामने आए हैं। लोहियानगर के अलावा वेदव्यासपुरी तथा गंगानगर का भी सर्वे किया जा रहा है कि कहां-कहां इस तरह के कब्जे हैं। एमडीए नए सिरे से अपनी संपत्तियों का सर्वे करेगा। 

सक्रिय होते, तो न होते कब्जे
एमडीए के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों, मेट का यह खेल है। बताया जा रहा है कि कुछ मेटों ने इस बाबत कब्जा करने वालों से किराया वसूला है। यदि मेट अपने क्षेत्र में सक्रिय होते तो इन पर कब्जे ही नहीं होते। उन्होंने ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं दी जिस पर शुरू में ही काम हो पाता। अहम यह है कि वीसी ने निर्देश दिए थे कि तीन माह से ज्यादा एक ही सर्किल में जमे मेटों को हटाया जाए और उसकी रिपोर्ट सभी जोनल प्रभारी भेेजें। लेकिन इन रिपोर्ट में भी गड़बड़ी की गई। काफी मेट पुराने ही स्थानों पर कई कई साल से अभी जमे हैं।

शराब की दुकान खोलकर करा दिया सील
अवैध रूप से शराब की दुकान चलाने वाले कुछ लोगों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की तो उन्होंने कब्जा किए गए एमडीए के लोहियानगर स्थित एक मकान का पता प्रशासन को दे दिया। दरअसल यह धंधा यहां संचालित हो रहा था। ऐसे में इस आवास को प्रशासन ने सील कर दिया। सचिव एमडीए राजकुमार ने इस पर पत्र व्यवहार किया। कहा है कि इस मकान की सील हटाई जाए और फर्जी पता देने वालों पर एक मुकदमा एमडीए की तरफ से दर्ज कराया जाए। यह मकान एमडीए का है। ऐसे में इस पर सील हटाई जाए।

डूडा के आवासों पर भी कब्जे
परतापुर क्षेत्र में सरकार की तरफ  से गरीबों के लिए बनाए जा रहे डूडा की योजना के मकानों पर अवैध कब्जे हो गए हैं। परतापुर के महरौली मार्ग व अच्छरोंडा बहादरपुर मार्ग पर पिछली सरकारों में भी मकान बनाए गए थे। कुछ ही लोगों को यहां आवंटन हो सका था क्योंकि मकान पूरे नहीं हुए थे। बाद में इन आवासों का निर्माण पूरा हो गया। यहां लगभग पांच सौ आवास बने। लेकिन इनमें भी लोगों ने कब्जे कर लिए। यहां 300 से ज्यादा मकानों पर इसी तरह के कब्जे हो गए हैं।
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अवैध रूप से बिजली, पानी भी चालू
इन आवासों में अवैध रूप से बिजली-पानी भी चालू है। सेटिंग से सभी व्यवस्थाएं हुई हैं। परतापुर स्थित आवास तो काफी संख्या में बने हैं ऐसे में वहां पूरी बस्ती ही अवैध रूप से डेवलेप हो गई हैं। 

कब्जा मुक्त कराएंगे सभी आवास
इस बाबत शिकायत आ रही है कि लोगों ने एमडीए के मकानों पर अवैध रूप से कब्जे कर लिए हैं। मैंने इस बाबत पुलिस फोर्स मांगने को कहा है। सभी मकानों को कब्जामुक्त कराकर एमडीए अपने कब्जे में लेगा। - साहब सिंह, वीसी एमडीए

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