गढ़ रोड स्थित शिवशक्ति नगर में बुधवार शाम तीन मंजिला निर्माणाधीन बिल्डिंग गिरने से हड़कंप मच गया। मलबे में आठ लोगों के दबे होने की आशंका है। स्थानीय लोगों ने हंगामा करते हुए सड़क जाम कर दी। मलबा हटाने के लिए पुलिस, नगर निगम और फायर ब्रिगेड के साथ सेना और एनडीआरएफ को भी लगाया गया है। इस हादसे का कारण निर्माणाधीन बिल्डिंग से सटे प्लाट में निजी अस्पताल के बेसमेंट के लिए जेसीबी से खुदाई करना बताया गया। डीएम ने अवैध निर्माण में साठगांठ की बात सामने आने पर एमडीए के दो अवर अभियंताओं और खुदाई करने वाले ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिये हैं।
हादसा बुधवार शाम करीब 5:30 बजे का है। गढ़ रोड पर शिव शक्ति नगर में मुकेश गोयल का धर्मकांटा है। मुकेश द्वारा धर्मकांटे के पीछे तीन मंजिला बिल्डिंग का निर्माण कराया जा रहा था। बिल्डिंग से सटे एक प्लाट में अस्पताल का बेसमेंट बनाने के लिए खुदाई चल रही है। जेसीबी बेसमेंट की खुदाई कर रही थी, तभी निर्माणाधीन बिल्डिंग गिर गई। इसमें काम कर रहे मुनेश समेत आठ लोगों के मलबे में दबे होने की सचना से हड़कंप मच गया।
सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। लोगों ने हंगामा करते हुए गढ़ रोड पर जाम लगा दिया। पुलिस ने किसी तरह लोगों को हटाया और जेसीबी मंगवाकर मलबे हटाने में जुट गई। इस हादसे और मौके के हालात देखते हुए डीएम पंकज यादव व एसएसपी डीसी दूबे भी मौके पर पहुंच गए। इस बीच, सेना और गाजियाबाद से एनडीआरएफ को भी बुला लिया गया। आर्मी, पुलिस, प्रशासन, नगर निगम समेत कई विभागों की टीम मलबे हटाने में लग गईं।
मलबा हटाने में जुटीं टीमें
मलबे में दबे लोगों के परिजनों ने हंगामा कर दिया। एसएसपी ने लोगों को शांत करते हुए बताया कि मलबे में एक जेसीबी, एक ट्रैक्टर टॉली, एक बाइक समेत आठ लोगों के दबे होने की आशंका है। टीमें मलबा हटाने में जुटी हैं। उसके बाद ही लोगों की संख्या का पता चल सकेगा।
अवैध बन रहा था बेसमेंट
डीएम पंकज यादव ने अवैध तरीके से बेसमेंट की खुदाई होने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक तौर पर ठेकेदार द्वारा एमडीए के जेई पीयूष त्यागी और पीके गुप्ता से साठगांठ कर खुदाई करने की बात सामने आई है। इस पर उन्होंने एसएसपी को ठेकेदार और दोनों जेई के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिये हैं।
एमडीए के भ्रष्टाचार ने इतने बड़े हादसे को न्यौता दे दिया। एमडीए अधिकारियों की शह पर शहर भर में अवैध निर्माण या तो हो चुके या हो रहे हैं। जहां यह बिल्डिंग गिरी, वहां अवैध निर्माणों की बाढ़ आई हुई है और संबंधित जेई यहां बस सेटिंग-गेटिंग का खेल कर रहे थे। अमर उजाला ने अवैध निर्माणों के मामले कई बार उठाए।
गढ़ रोड पर इमारत गिरने से हड़कंप की स्थिति है। इस हादसे का जिम्मेदार पूरी तरह से एमडीए अधिकारियों को माना जा रहा है। हैरत की बात यह है कि पूरे शहर में ही अवैध निर्माण हो रहे हैं पर एमडीए अधिकारी इस तरफ चुप्पी साधे बैठे हैं।
गढ़ रोड में जहां यह बिल्डिंग गिरी है, उस क्षेत्र की बात करें तो यह एमडीए का जोन डी है। यहां तैनात अवर अभियंता पीयूष त्यागी और पीके गुप्ता दोनों पर ही कई बार यहां अवैध निर्माण को बढ़ावा देने का आरोप लगा, लेकिन दोनों ने ही इस तरफ गंभीरता नहीं दिखाई।
पूरे क्षेत्र में अवैध निर्माण होता रहा। हालांकि अब कहा जा रहा है कि दोनों ही संपत्तियों पर नोटिस जारी किया गया था, पर अहम बात यह है कि इन नोटिस की थानों में कोई सूचना नहीं है। माना जा रहा है बैक डेट में नोटिस काटे जा रहे हैं।
रात को ही तलब
एमडीए अधिकारियों को रात को ही तलब कर लिया गया। वीसी राजेश कुमार ने सभी को रात को बुलाया। सचिव अश्वनी कुमार शर्मा को मुजफ्फरनगर से, जोन प्रभारी अजित त्यागी एवं नोडल अधिकारी रामपाल सिंह राठौड़ को गाजियाबाद से बुलाया गया। एमडीए के काफी अधिकारी शाम होते ही यहां से दूसरे जिलों को रवाना हो जाते हैं, क्योंकि वे वहीं निवास करते हैं।
तीन मंजिला बिल्डिंग जमींदोज होते देखी तो स्थानीय लोगों और वहां से गुजर रहे लोगों के कदम ठहर गए। लोगों को यह तो पता था कि जो बिल्डिंग में मजदूर काम कर रहे थे, लेकिन उनकी संख्या का किसी को नहीं पता था।
यह जाने बगैर ही भीड़ मलबा हटाने की कोशिशों में जुट गई। हाथ को हाथ न सूझा और जिस पर जो बन पड़ा वह किया। शुरूआत में संसाधन सीमित थे, लेकिन मलबे में फंसे लोगों को बचाने का साहस ज्यादा था। बाद में पहुंचे सरकारी अमले ने बचाव अभियान की कमान संभाल ली।
शास्त्री नगर निवासी राजीव गोयल ने बताया कि वह बाइक से जा रहे थे। हादसा होते देख उन्होंने बाइक खड़ी की और लोगों के साथ मलबा हटाने में जुट गए। जागृति विहार के राजेंद्र पाल और उनका बेटा दीपक भी वहां मदद करने पहुंच गए। उन्होंने फोन पर अपने दोस्तों को भी बुला लिया था।
सरकारी मदद पहुंचने से पहले ही लोग अपने स्तर से बचाव कार्य में जुट गए थे। संसाधन कम होने के बावजूद मन में विश्वास था कि उन्हें किसी की जान बचानी है। वे नि:स्वार्थ ही पूरी मेहनत से जुटे रहे। सरकारी मदद पहुंचने के बाद भी वह पीछे नहीं हटे और उनकी भी मदद करते रहे। वहीं मौके पर पहुंचे कुछ लोग मलबे में दबे लोगों के लिए प्रार्थना करते नजर आए।
संख्या जानने की कोशिश करते रहे
मौके पर पहुंचे आला अफसर यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर मलबे में कितने लोग दबे हैं लेकिन सही जानकारी कोई नहीं दे पा रहा था। कोई सात बता रहा था तो कोई आठ। इस कारण देर रात तक भी इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई थी।
कौन थे नीली बत्ती की गाड़ी में अफसर
मेरठ। आसपास के लोगों का कहना है कि एमडीए के लोग अक्सर इस क्षेत्र में आते रहते थे। अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के बजाय महज खानापूर्ति करके लौट जाते थे। स्थानीय लोगों ने एमडीए के अधिकारियों पर उगाही के आरोप भी खुलकर लगाए।
उन्होंने कहा कि दोपहर बाद से ही एक नीली बत्ती लगी गाड़ी उस क्षेत्र में घूम रही थी। उसमें एमडीए के हलके के जेई सहित कोई और अधिकारी था। जब बिल्डिंग गिरी तो उस
समय भी ये अधिकारी वहीं मौके पर ही मौजूद थे। जैसे ही भीड़ बढ़ी और हंगामा होने लगा वे अधिकारी अपनी गाड़ी लेकर वहां से फरार हो गए। यह कहा गया कि जेई जेई पीयूष त्यागी इसमें मौजूद थे।
एमडीए अधिकारियों पर गुस्सा इसलिए और ज्यादा बढ़ा कि हादसे के बाद भी एमडीए का कोई अधिकारी वहां नहीं पहुंचा। लोगाें ने आरोप लगाया कि उगाही के लिए तो एमडीए के कर्मचारी वहां चक्कर लगाते रहते थे, लेकिन इतनी बड़े हादसे पर किसी ने पहुंचने की जरूरत नहीं समझी।
एनडीआरएफ, सेना ने संभाला मोर्चा
निर्माणाधीन बिल्डिंग गिरने की सूचना मिलने पर एनडीआरएफ की आठवीं बटालियन रात दस बजे मेरठ पहुंची। 45 सदस्यों की टीम का नेतृत्व रविंद्र कुशवाहा ने किया। इसके अलावा सेना की ओर से 71 इंजीनियरिंग रेजीमेंट के तीन दर्जन से ज्यादा जवान और अधिकारी मौजूद रहे।
गाजियाबाद में एनडीआरएफ के कमांडेंट पीके श्रीवास्तव ने बताया कि बुधवार रात आठ बजे मेरठ के जिलाधिकारी की कॉल आई थी। उन्होंने बताया कि निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत गिर गई है और वहां कुछ मजदूरों के दबे होने की आशंका है। इसके बाद एनडीआरएफ की टीम मेरठ के लिए रवाना कर दी गई। उन्होंने बताया कि टीम ने मलबा हटाकर बचाव कार्य शुरू कर दिया है। सेना ने उससे पहले ही मोर्चा संभाल लिया।
जो लोग स्थानीय पुलिस प्रशासन की हीलाहवाली से नाराज थे, उन्होंने सेना के पहुंचने पर राहत की सांस ली। सेना ने घेरा बनाकर वहां से लोगों को हटाया और निगम की टीम के साथ मिलकर रेस्क्यू अभियान तेज कर दिया।
बिल्डिंग गिरते ही मच गई चीखपुकार, अफरातफरी
शाम के 5:46 बजे थे। जेसीबी बेसमेट की नीव खोदने में लगी थी, ट्रैक्टर ट्राली से मिट्टी भराव का काम हो रहा था। तभी अचानक बराबर में मुकेश गोयल की निर्माणाधीन तीन मंजिला बिल्डिंग भरभराकर गिरी। हल्ला मचा कि मलबे में आठ लोग दब गए हैं।
चारो तरफ चीख पुकार मच गई। सैकड़ों लोगों की उमड़ी भीड़ मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने की कोशिश में जुट गए, लेकिन नाकामयाब रहे। मेडिकल पुलिस पहुंची तो लोगों ने हंगामा करते हुए जेसीबी की मांग शुरू कर दी। भीड़ का आलम देख पुलिस को डर लगने लगा कि जेसीबी से मलबा हटाते समय कोई दूसरा हादसा न हो जाए, इसलिए पुलिस ने बलपूर्वक भीड़ को हटाया।
हाथों से ही जुटी भीड़
निर्माणाधीन बिल्डिंग जब भरभराकर गिरी तो लोगों की भीड़ ने हाथों से ही मलबा हटाना शुरू कर दिया। पुलिस ने लोगों को हटाते हुए एक के बाद एक दस जेसीबी मशीन लगा दी थीं। रात 12 बजे तक जेसीबी दो लेंटर का मलबा ही हटा सकी। अंतिम और तीसरा लेंटर हटने पर ही दबे लोगों को बाहर निकालने की बात कही गई।
डेरा सच्चा सौदा की टीम भी पहुंची
रात करीब नौ बजे डेरा सच्चा सौदा की टीम मौके पर पहुंची। जेसीबी मशीन को लगवाने और मलबा हटाने में डेरा सच्चा सौदा की टीम ने पूरी मदद की। टीम के सदस्यों ने मलबा फावड़े से हटाया।
अफसरों ने की मशक्कत
लोगों की भीड़ कंट्रोल करने में एसपी सिटी ओपी सिंह और एसडीएम दिव्या मित्तल ने सबसे ज्यादा मशक्कत की। दिव्या मित्तल बार-बार बताती रहीं कि जेसीबी मशीन को कहां लगाने से मलबा जल्द हटेगा। दिव्या मित्तल ने कड़ा रुख अपनाते हुए नगर निगम और एमडीए की टीम को बुलाकर मदद कराने को कहा।
इलाके के लोगों में दहशत
तीन मंजिली बिल्डिंग गिरते ही आसपास के घरों में रहने वाले लोग भी दहशत है। मलबा हटवाने में लगी जेसीबी से लोग डर रहे थे कि कहीं उनका मकान न गिर जाए। आसपास के घरों की छत पर खड़े लोगों को एसपी सिटी ने माइक से बताया कि वह तुरंत नीचे आ जाएं। कोई भी हादसा हो सकता है। पुलिस को लोगों की भीड़ हटाने के लिए लाठी भी फटकारनी पड़ी।
कैसे छोड़ दूं 25 लाख की जेसीबी
बिल्डिंग गिरते ही जेसीबी से कूदकर ड्राइवर वहां से भाग गया। जेसीबी का मालिक अखिल आराधना वहां पर पहुंचा। वह बार-बार जेसीबी के पास जा रहा था। पुलिस उसे पीछे करती तो वह बोलता कि मलबे में उसकी जेसीबी मशीन दबी है। वह 25 लाख रुपये की मशीन छोड़कर कहां जाएगा। जिसके बाद पता चला कि जेसीबी अखिल की है।
मुझे बाइक की पड़ी है...
मलबे में एक बाइक भी दबी है। दिनेश भी बार-बार जाता और पुलिस से कहता कि मेरी बाइक तो निकालो। जिस पर पुलिस ने उसको धमकाया कि तुझे बाइक की पड़ी है, यहां मलबे में इतने लोग दबे पड़े हैं, जिनको बचाना बहुत जरूरी है। ट्रैक्टर ट्राली भी फंसी है, जिसके बारे में लोगों ने पुलिस को बताया।
‘मुनेश बाहर आ जाओ’
मलबे में दबे मुनेश की जानकारी लगते ही परिजन बेहाल हो गये। परिजन चिल्लाते रहे कि मुनेश बाहर आ जाओ। महिलाएं दौड़ाकर मलबे के पास तक जा रही थीं। महिलाओं को संभालने के लिए महिला पुलिस भी बुलाई गई।