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एमडीए, आवास विकास ने बेच दी 20 अरब की सरकारी भूमि, खाली जमीन पर कूड़ा डालने की योजना बना रहा निगम 

Wed, 16 Oct 2019 11:06 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ नगर निगम प्रशासन ने एमडीए और आवास विकास पर 20 अरब रुपये की सरकारी भूमि बेचकर खजाना भरने का आरोप लगाया है।
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निगम प्रशासन ने दोनों विभागों से प्रबंधन की सरकारी भूमि की कीमत मांगी है, वहीं उसकी एवज में एमडीए और आवास विकास से कालोनियों में डंपिंग ग्राउंड के लिए जगह मांग ली है। निगम प्रशासन ने शहर में कूड़े के लिए जगह की जरूरत बताई है। 

एमडीए ने शहर के शताब्दीनगर, लोहियानगर, श्रद्धापुरी प्रथम व द्वितीय, गंगानगर, रक्षापुरम, डिफेंस कॉलोनी, पल्लवपुरम में आवासीय कॉलोनी विकसित की है। उधर माधवपुरम, शास्त्रीनगर और जागृति विहार को आवास विकास ने विकसित किया है।
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नगर निगम प्रशासन का आरोप है कि एमडीए और आवास विकास की कॉलोनियों में 16 हजार मीटर भूमि सरकारी थी, जो नगर निगम प्रबंधन की थी। उसको भी विभागों ने बेच दिया। भूमि की कीमत 20 अरब से ज्यादा है।

बदले में मिले भूमि या कीमत 
निगम प्रशासन का कहना है कि कोई भी विभाग अगर दूसरे विभाग की भूमि का प्रयोग करता है तो उसके एवज में भूमि उपलब्ध कराएगा या फिर भूमि की कीमत देगा। एमडीए और आवास विकास ने इनमें से कोई कदम नहीं उठाया है। जबकि नगर निगम को भूमि की जरूरत है। 

पूर्व में भी हो चुका है पत्र व्यवहार 
एमडीए और आवास विकास से भूमि की कीमत वसूली के लिए पूर्व में भी नगर निगम पत्र व्यवहार कर चुका है। एक बार नगर निगम ने आवास विकास से धनराशि वसूली के लिए शास्त्रीनगर स्थित कार्यालय पर ताला जड़ दिया था। बाद में उच्चाधिकारियों के कहने पर ताला खोला गया। अब नगर निगम प्रशासन ने फिर से पत्र जारी किया है। 
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खाली भूमि पर डालेंगे कूड़ा 
शहर से निकलने वाले कूड़े को डालने के लिए सरकारी खाली भूमि नहीं मिल रही है। लोहियानगर में भी डंपिंग ग्राउंड भर गया है। अब एमडीए और आवास विकास की खाली पड़ी भूमि को चिह्नित कर कूड़ा डाला जाएगा।

वैसे भी एमडीए और आवास विकास की कॉलोनियों में कूड़े का स्थान चिह्नित होता है, लेकिन मौके पर नहीं दिखाई दे रहा। अब जमीन की धनराशि या फिर भूमि की मांग के लिए दोनों विभागों को पत्र भेजा गया है। -राजेश कुमार, संपत्ति अधिकारी नगर निगम।  
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