इसी बीच यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की कॉपियां बदलने के खेल का एसटीएफ ने भंडाफोड़ किया तो पेपर लीक मामले में भी सुराग मिल गए। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर से सघन पूछताछ की जा रही है। ये डॉक्टर उसी कॉलेज का है, जिसका लिफाफा खोलकर दोबारा से चिपकाए जाने की आशंका व्यक्त की जा रही थी। इसी के साथ एसटीएफ की टीम ने छानबीन की तो कई कर्मचारी यूनिवर्सिटी का प्रकरण सामने आने के बाद से छुट्टी पर चले गए हैं। ये कर्मचारी इसी डॉक्टर से जुड़े हुए हैं। ऐसे में इसी रैकेट द्वारा पेपर आउट कराने की बात सामने आ रही है। एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक एक-दो आरोपियों के पकड़े जाने के बाद पूरा मामला साफ हो जाएगा।
पांच लाख में पेपर बेचा
पूरे प्रकरण में सीसीएसयू के एक छात्र नेता का नाम भी पांच लाख रुपये में मुजफ्फरनगर में पेपर बेचने में सामने आया था। ऐसे में टीम इसकी भी तलाश में जुटी है। छात्र नेता से जुड़े कई दूसरे छात्रों के नाम भी इस रैकेट से जुड़ रहे हैं।
तो अब तक खुल जाता केस
एमबीबीएस का पेपर लीक हुए एक माह से ज्यादा हो गया। इस मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से मेडिकल थाने में तब ही रिपोर्ट दर्ज करा दी गई थी। शासन को भी अवगत कराया गया था। लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने कोई काम नहीं किया। यूनिवर्सिटी द्वारा बनाई समिति तक से लिफाफों के बारे में भी रिपोर्ट नहीं ली गई। इसी कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया। ऐसे में अब यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को भी एसटीएफ टीम पर ही भरोसा है। छात्रों का भी कहना है कि पेपर लीक मामले को एसटीएफ ही खोल सकती है।
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