महापौर के साथ कार्यकारिणी के सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
महापौर ने जनहित के विभिन्न बिंदुओं को लेकर 17 जुलाई को टाउन हॉल के तिलक भवन में कार्यकारिणी बैठक बुलाने के लिए 12 जुलाई को नगरायुक्त को पत्र भेजा था। महापौर का आरोप है कि नगरायुक्त मनोज कुमार से वह लगातार फोन पर वार्ता करने का प्रयास करती रही हैं। लेकिन उन्होंने न तो 16 जुलाई शाम तक फोन पर ही कार्यकारिणी बैठक निरस्त करने की बात कही और न ही पत्र भिजवाया। देर रात्रि 9:30 बजे घर पहुंचने पर गार्ड से पता चला कि निगम के कर्मचारी द्वारा एक पत्र दिया गया है। हमने रात्रि में पत्र खोलकर नहीं देखा। निर्णय लिया था कि मीडिया के सामने ही पत्र को खोला जाएगा। महापौर ने बताया कि जो पत्र 16 जुलाई के रात्रि में उनके आवास पर भेजा गया है, उसमें पत्र व्यवहार की तिथि 13 जून लिखी है। जिसमें कार्यकारिणी बैठक न किए जाने के पीछे मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले बिंदु पॉलिथीन, पौधरोपण और कांवड़ यात्रा हैं। जुलाई के अंतिम सप्ताह में बैठक करने की बात कही गयी है।
मुख्यमंत्री, मंत्री और कमिश्नर को लिखूंगी पत्र
महापौर ने कहा कि नगरायुक्त मेरे साथ ही नहीं बल्कि सभी पार्षदों के साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं। टाउन हॉल में हमारा बैठने तक का अधिकार छीन लिया है। जनता की समस्याओं का निस्तारण नहीं किया जा रहा है। पार्षद अपने घर पर न सोने को मजबूर हो रहे हैं। इन सभी बिंदुओं पर मैं सीएम, नगर विकास मंत्री और कमिश्नर को पत्र लिखूंगी। पूछूंगी कि क्या इस तरह प्रदेश का विकास संभव है। क्या सीएम ने कोई ऐसा आदेश दिया है कि नगरायुक्त महापौर सहित पूरे सदन का अपमान करेंगे और शहर का विकास ठप कर देंगे। निगम अधिकारियों की खराब कार्यप्रणाली ने शहर को दस साल पीछे धकेल दिया है।
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