शहर और नालों की सफाई, सड़क निर्माण, पानी, सीवर आदि की समस्याओं को लेकर भाजपा के शहर विधायक और महापौर में ठन गई है। जहां शहर विधायक ने महापौर की क्षमता पर सवाल खड़े किए हैं, तो वहीं महापौर ने शहर विधायक को भी अपने कार्यों का मूल्यांकन करने की सलाह दे डाली है।
विज्ञापन
दोनों जन प्रतिनिधियों में वर्चस्व की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। मामला भाजपा महानगर अध्यक्ष और उच्चस्तरीय संगठन तक पहुंच गया है। विधानसभा चुनाव का मतदान होते ही शहर विधायक डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। विधायक ने शहर के नालों की सफाई का मुद्दा उठाकर जहां चार दिन पहले ही नगर निगम डिपो में खड़ी करोड़ों रुपये से खरीदी गई बड़ी और छोटी पोर्कलेन मशीनों को माला पहनाई थी। वहीं, निगम अधिकारी और महापौर को साथ लेकर ओडियन, आबूनाला और काली नदी का निरीक्षण किया था।
शनिवार को शहर विधायक कार्यकर्ताओं के साथ निगम के सूरजकुंड और दिल्ली रोड वाहन डिपो से स्वयं ही मशीनों को बाहर करने की योजना बनाकर पहुंचे थे। लेकिन, इनके पहुंचने से पहले ही निगम अधिकारी व कर्मचारियों ने आनन-फानन में मशीनें सूरजकुंड नाले और दिल्ली रोड स्थित कूड़े के ढेर पर लगा दीं। विधायक ने जहां डिपो प्रभारी की क्लास लगायी। वहीं, नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने किसी का फोन उठाना ही मुनासिब नहीं समझा।
विज्ञापन
मेयर के नियंत्रण में नहीं निगम के अफसर
भाजपा विधायक डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी
आप शहर में नाले और सड़कों की सफाई से कितने संतुष्ट हैं?
बिल्कुल भी नहीं, नगर निगम ने आज तक सिर्फ कागजों में काम किया है।
निगम द्वारा शहर में पीने के पानी की सुविधा को लेकर क्या कहना है?
अभी इसमें भारी खामियां हैं, निगम यहां भी संतोषजनक काम नहीं कर पाया है।
निगम स्वास्थ्य विभाग, जलकल और टैक्स विभाग में उजागर हुए घोटालों पर आपका क्या कहना है?
अगर सब कुछ सही होता तो शहर स्मार्ट सिटी में चयनित हो गया होता।
निगम द्वारा चार साल में शहर में बनायी गई सड़कों की गुणवत्ता आपके हिसाब से कैसी है?
गुणवत्ता को संतोषजनक कहा जा सकता है। लेकिन जब तक जलभराव रहेगा, सड़कें टूटती रहेंगी।
स्मार्ट सिटी के लिए वोटिंग कराने से लेकर शासन में बात करके आपने काफी मेहनत की, अब उसका क्या हश्र है?
नगर निगम शतप्रतिशत हाउस टैक्स और वाटर टैक्स लगाकर आय का श्रोत बढ़ाकर दिखाता, तो स्मार्ट सिटी में चयनित हो गया होता। लेकिन नगर निगम के अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार है।
आपका कहना है कि नगर निगम में कमीशन का खेल हो रहा है, धन की बंदरबांट हो रही है। क्या यह वाकई सही है? यह आरोप किस आधार पर लगाए हैं?
अधिकारियों की कमीशनखोरी साफ नजर आती है। यदि पारदर्शिता और ईमानदारी से काम होता, तो शहर का चेहरा कुछ और होता।
आपकी पार्टी के महापौर हैं। क्या शहर में सफाई, पानी, बिजली आदि समस्याओं के समाधान कराने में सक्षम नहीं हैं?
ऐसा प्रतीत होता है कि महापौर की चल नहीं रही है। महापौर में अपनी बात मनवाने की अधिकारियों से क्षमता नहीं हैं। वैसे महापौर से हमारा कोई विवाद नहीं है। दुर्दशा के लिए अधिकारी ज्यादा जिम्मेदार हैं। महापौर का अधिकारियों पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं है।
आखिर चुनाव के बाद अचानक क्या हुआ, जो आपको नाला सफाई को लेकर सड़कों पर उतरना पड़ रहा है?
मैं चुनाव से पहले भी इस मुद्दे पर सड़कों पर था और चुनाव में जनता से वादा किया था कि चुनाव बाद फिर से इस मुद्दे को उठाऊंगा।
आपकी इस कार्यप्रणाली से महापौर असंतुष्ट हैं। वह पार्टी हाईकमान से इस संबंध में बात करने और पूरे प्रकरण से अवगत कराने की बात कर रहे हैं?
महापौर को असंतुष्ट नहीं होना चाहिए। मेरा उनसे कोई मतभेद नहीं है। मैं शहर विधायक हूं। मुझे जनता की आवाज उठाने और समस्याओं का समाधान कराने का अधिकार है। मैं जनप्रतिनिधि होने के नाते अपना काम कर रहा हूं।
क्या आपकी महापौर और पार्टी नेताओं से कुछ बात हुई?
महापौर से पांच-छह दिन पहले बात हुई थी। जब चार दिन बाद भी कुछ नहीं हुआ तो आज मुझे निकलना पड़ा और मेरे डिपो पर पहुंचने से दस मिनट पहले ही मशीन डिपो से निकाल दी गयी।
शहर विधायक का आरोप है कि नगर निगम में कमीशन का खेल और धन की बंदरबांट हो रही है। इससे आप कितना सहमत हैं?
जब भी कोई घोटाले का विषय सामने आया है तो हम जांच के आदेश देते रहे हैं।
शहर विधायक बार-बार नालों की सफाई को लेकर निगम डिपों में छापेमारी कर रहे हैं। क्या विधायक जी आपसे नाराज हैं?
यह तो शहर विधायक ही जानें कि वह ऐसा करके जनता में क्या संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं।
आप शहर विधायक द्वारा छापेमारी की शिकायत पार्टी हाईकमान में क्यों करना चाहते हैं?
हमारे यहां जो भी ऐसा विषय आता है। हम पार्र्टी महानगर अध्यक्ष एवं संगठन के सामने रखते हैं। जो संगठन का निर्णय होता है, उसका पालन करना होता है।
शहर विधायक को अपने स्तर पर नगर निगम में हस्तक्षेप करने का अधिकार है या नहीं?
वह हमें जो भी काम बताते हैं, तो हम उसी तरह काम कराते हैं। फिर उन्हें स्वयं निर्णय लेना चाहिए कि क्या गलत है क्या सही।
क्या आपको उम्मीद है कि पार्टी महानगर अध्यक्ष या अन्य नेता आपकी सूचना पर गौर करेंगे?
हमारी दी गई सूचना पर पूरी सुनवाई होगी। जो भी संगठन का निर्णय माना जाएगा।
डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का कहना है कि टैक्स आदि बढ़ाकर निगम का कोष बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया गया?
ऐसा कहना गलत है। हमने छूटे भवनों पर टैक्स लगवाया और होर्डिंग से टैक्स वसूली बढ़वाई।
अतिक्रमण और जाम को लेकर शहर विधायक निगम को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इससे आप कितना सहमत हैं?
हमने अतिक्रमण हटवाने का पूरा प्रयास किया। जिला प्रशासन का सहयोग नहीं मिला। हम अतिक्रमण हटवाते थे तो सत्ताधारियों के फोन आ जाते थे।
क्या शहर विधायक से आपने अपने अधिकार के बारे में कभी बात करने का प्रयास किया?
हमने शहर विधायक से हमेशा निगम के विषय पर बात की। अधिकार पर उन्हें खुद सोचना चाहिए। वह हमारे बड़े नेता हैं।
नाला सफाई को लेकर आपने निगम अधिकारियों से क्या योजना बनवायी है?
नाला सफाई की पूरी योजना तैयार हो रही है। उस पर अमल होना शुरू हो गया है। हर साल 15 मार्च से शुरू होता था, हमने फरवरी में ही शुरू करा दिया।
शहर विधायक मेरठ का नाम स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल न होने के पीछे निगम को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इससे आप कितना सहमत हैं?
उप्र सरकार ने मेरठ को षड्यंत्र के तहत स्मार्ट शहरों की सूची से बाहर किया था। हमारे संघर्ष से स्मार्ट सिटी में शामिल होगा।