संगठन विस्तार में बसपा अपने पुराने कास्ट केमिस्ट्री फार्मूले पर काम करेगी। चूंकि भाईचारा कमेटियों का गठन नहीं हो सकता है तो ऐसे में बूथ कमेटियों के सहारे ही संगठन का ढांचा मजबूत करने की कवायद होगी। देखा यह जा रहा है कि विधानसभा क्षेत्र में भी किस जाति का आधार मजबूत है। उसी आधार पर नई टीम का गठन होगा। कैडर बेस्ड वोटर को ध्यान में रखते हुए भी पार्टी काम कर रही है। दलितों को साधने के लिए प्रत्येक एक कोऑर्डिनेटर के साथ अनुसूचित जाति कोऑर्डिनेटर तो रहेगा ही। इसके साथ, गुर्जर, मुस्लिम, जाट आदि का समन्वय रहेगा।
जिला प्रभारी पद होगा खत्म
लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर बसपा बड़ा फेरबदल यह करने जा रहा है कि जिला प्रभारी पद समाप्त होगा। बैठक में बसपा सुप्रीमो ने स्पष्ट कर दिया है कि जिला प्रभारी नहीं बनेंगे। जो हैं उन्हें हटाकर पूरा फोकस विधानसभा पर होगा। विस प्रभारी ही बनेंगे ताकि प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में शामिल विधानसभा क्षेत्र के प्रभारियों की अलग अलग जिम्मेदारी तय की जा सकें।
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