मौलाना मदनी ने कहा कि भारतीय संविधान में दिए गए अधिकारों के तहत मुसलमानों के धार्मिक और पारिवारिक मामलों में अदालतों व संसद को हस्तक्षेप करने का अधिकार हरगिज नहीं है। मुसलमान हर सूरत में शरीयती कानून का पालन करना अपना कर्तव्य समझता है और पालन करता रहेगा।
उन्होंने मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि तलाक-ए-बिद्दत से पूरी तरह बचें और शरीयत के हुक्म के मुताबिक निकाह, तलाक और अन्य पारिवारिक मामलों को तय करें। इसके साथ ही घरेलू विवादों के मामलों में दीनी पंचायत के द्वारा फैसले का रास्ता अपनाएं और सरकारी अदालतों व मुकदमेबाजी से परहेज करें।
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