जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कोरोना काल के बढ़ते प्रकोप को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइड लाइन को सामने रखते हुए ईद-उल-अजहा का त्योहार मानने की अपील की है, साथ ही कहा की बेहतर है कि सूरज निकलने के बीस मिनट बाद संक्षिप्त रूप से नमाज और खुत्बा अदा कर कुर्बानी की जाए।
सोमवार को मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि देश विशेषकर उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की परिस्थितियों को देखते हुए मुसलमानों से ये अपील है कि प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी से बचें। चूंकि मजहब में इसके बदले काले जानवरों की कुर्बानी जायज है। उन्होंने कहा कि अगर किसी जगह उपद्रवी काले जानवरों की कुर्बानी से भी रोकते हैं तो कुछ समझदार और प्रभावशाली लोगों द्वारा प्रशासन को विश्वास में लेकर कुर्बानी की जाए। यदि फिर भी मजहबी वाजिब को अदा करने का रास्ता न निकले तो किसी करीबी जगह जहां कोई दिक्कत न हो, वहां जाकर कुर्बानी की जाए।
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मौलाना मदनी ने कहा कि कुर्बानी के बाद अवशेषों को इस तरह दफन किया जाए कि उससे दुर्गंध न आए और उससे किसी को परेशानी न हो। इसके साथ ही महामारी से बचने के लिए सुझाए तमाम उपायों का इस्तेमाल भी करें।
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