वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते जमीयत उलमा-ए-हिंद ने बड़ा फैसला लिया है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि कोरोना महामारी की वजह से जमीयत अबकी बार चंदा नहीं लेगी।
बृहस्पतिवार को मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि जो संगठन से जुड़े हैं वो भी और जो नहीं जुड़े हैं वो लोग भी, सभी असहाय लोगों की विकट परिस्थितियों में मदद करें। इसके साथ ही मौलाना मदनी ने कहा कि मदारिस-ए-इस्लामिया मजहब की बुनियाद है।
इस्लाम नमाज, रोजे या इबादत का नाम नहीं बल्कि व्यवहार अच्छा होना चाहिए। हमें चाहिए कि हम मदारिस के हकों को अदा करें औए जमीयत को दिया जाने वाला चंदा इन मदारिस तक पहुंचाए। क्योंकि इन्हें जिंदा रखने की जरूरत हैं।
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उन्होंने कहा कि आज जिस दौर से हिंदू-मुस्लिम गुजर रहा है, उसमें उनकी मदद करनी चाहिए। मदनी ने आरोप लगाया कि सरकारी अफसरान फिरकापरस्त जहनियत रखते हैं। जिसके चलते वो इस नाजुक स्थिति में भी बच्चों को परेशान कर रहे हैं।
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