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आशाओं की मनमानी का शिकार हो रही मातृत्व वंदना योजना

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सुविधा शुल्क के चक्कर में बेटियां कन्या सुमंगला योजना के लाभ से वंचित
गौरव शर्मा
मेरठ। जिले में मातृत्व वंदना और कन्या सुमंगला योजना आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मनमानी से दम तोड़ रही है। पिछले तीन माह में 41 फीसदी गर्भवती तो 31 फीसदी बेटियां ही योजनाओं से लाभान्वित हो पाई हैं।
काम करने वाली महिलाओं की मजदूरी के नुकसान की भरपाई और गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए केंद्र सरकार द्वारा मातृत्व वंदना योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को तीन किस्तों में 5000 हजार रुपये दिए जाते है। योजना का लाभ दिलाने की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं की है। पंजीकरण के लिए आशाएं गर्भवती महिलाओं से सुविधा शुल्क मांगती हैं। सुविधा शुल्क नहीं देने पर पंजीकरण नहीं किया जाता है। नतीजा, तीन माह में कुल पंजीकरण 3105 में से 1270 महिलाओं को ही एक हजार रुपये की पहली किस्त मिली है।
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दूसरी ओर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की लड़कियों की शिक्षा और उनके अच्छे भविष्य के लिए चलाई जाने वाली कन्या सुमंगला योजना की स्थिति भी दयनीय है। जिले में अब तक 9,820 बेटियों के आवेदन आए हैं जिनमें से 4,196 जांच के बाद सही पाए गए और इनमें से 3,114 बेटियों को ही पहली किस्त का लाभ मिल सका है। इस योजना में सरकार द्वारा बेटियों को 15 हजार रुपये छह किस्तों में दिए जाते हैं।
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अधिकतर को नहीं मिल पाती तीसरी किस्त
सुविधा शुल्क की मांग के चलते अधिकतर गर्भवती महिलाओं को तीसरी किस्त से वंचित रहना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2017 से दिसंबर 2020 तक 47,138 महिलाओं को पंजीकृत किया गया। इनमें से 41,903 महिलाओं को पहली, 42,515 को दूसरी और 27,142 महिलाओं को ही तीसरी किस्त का लाभ मिला है।
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--केस स्टडी---
नहीं मिला लाभ
कन्या सुमंगला योजना के तहत दो बेटियों के लिए आवेदन किया था। कई बार अधिकारियों के पास भी गए लेकिन इसका कोई भी नतीजा नहीं निकला।
- पुष्पा देवी, निवासी कांशीराम कॉलोनी
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नहीं हुआ पंजीकरण
24 नवंबर को बेटा हुआ है। मातृत्व वंदना योजना के तहत उनका पंजीकरण नहीं किया गया जिसके चलते उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला।
- ममता जोशी, शास्त्री नगर
---कोट---
सीधे खाते में जाती है धनराशि
योजना का लाभ प्राप्त करने वाली महिलाओं को सरकार की तरफ से ही धनराशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। जिला स्तर पर आवेदनों की जांच कर आगे भेज दिया जाता है।
- पूजा शर्मा, एसीएमओ
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