घर पर बैठे सलीम पतला के भाई
- फोटो : अमर उजाला
पीएसी कैंप पर बम फेंकने के आरोपी सलीम पतला की तीन साल पहले गिरफ्तारी के दौरान पुलिस अफसरों ने लंबे-चौड़े दावे किए थे। उसे इंडियन मुजाहिदीन का सदस्य तक बताते हुए आतंकी संगठनों की मदद करने में उसकी अहम भूमिका बताई। लेकिन कोर्ट में इन सब आरोपों को पुख्ता सुबूतों में नहीं बदल पाए। यही कारण रहा कि सलीम जमानत पर छूट गया। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार सन 1992 में पीएसी कैंप पर पहला धमाका हुआ, जिसमें कई जवान घायल हुए थे। उसके बाद 26 जनवरी 1993 में सिविल लाइन क्षेत्र में पीएसी कैंप पर बम से हमला हुआ था। जिसमें दो जवान शहीद हुए थे। ये मामला टाडा अदालत में चला। इसमें दो आरोपियों अब्दुल जब्बार और मो. अय्यूब को उम्रकैद हुई। लेकिन मास्टर माइंड माने जाने वाला सलीम तक पहुंचने में पुलिस को करीब 22 साल लग गए। अक्तूबर 2014 में गिरफ्तारी के दौरान प्रेस कांफ्रेंस में पुलिस अफसरों ने दावे किए कि सलीम को बम बनाने की ट्रेनिंग पिलखुवा निवासी आतंकवादी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा ने दी थी। इसके बाद सलीम ने मेरठ समेत देशभर में कई धमाकों को अंजाम दिया। लेकिन पुलिस ने जो दावे प्रेस कांफ्रेंस में किए थे, उन्हें वो अपनी चार्जशीट में पुख्ता तरीके से साबित नहीं कर सकी।
मेरे भाई सलीम को साजिशन फंसाया
सलीम उर्फ पतला रविवार को इस्लामाबाद में अपने घर नहीं पहुंचा। पैंठ बाजार में कपड़ों का काम करने वाले सलीम के छोटे भाई सरफराज ने दावा किया कि सलीम ने पीएसी कैंप पर बम नहीं फेंके थे। कुछ पड़ोसियों ने साजिशन पुलिस से नाम ले दिया था। सलीम परिवार के साथ मुरादाबाद में रहता था। जिस आरोपी को उम्रकैद हुई थी, वह सलीम के घर पर नहीं रहता था, बल्कि पड़ोसी था। कोर्ट से एक दिन उन्हें भी इंसाफ मिलेगा।
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