मोदीपुरम। कृषि से अधिक आय प्राप्त करने के लिए ऐसी फसलों की खेती करें जो अन्य फसलों से अलग हो। जो कम समय में कम भूमि में उगाई जा सके। अन्य फसलों की तुलना में अधिक मुनाफे दे। इसके लिए मशरूम की खेती किसानों के लिए हितकर है।
मशरूम की खेती में अब तक सफेद मशरूम, बटन मशरूम, ओस्टर मशरूम ही उगाया जा रहा है, जबकि मशरूम की कुछ ऐसी प्रजाति हैं जिनको उगाकर अधिक से अधिक आमदनी प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए किसान औषधि मशरूम जेनोड्रमा ल्यूसिडम की खेती प्रारंभ करनी चाहिए। यह एक ऐसा मशरूम है। जो अरोग्य कारी गुण से भरा हुआ है। यह एक टॉनिक का काम करता है। जेनोड्रमा ल्यूसिडम से सौंदर्य प्रसाधन एवं टॉनिक पेय पदार्थ बनाए जाते है। इस मशरूम से ट्रिटरेपन नामक कंपोनेंट पाया जाता है। जो लोगों में ब्लड प्रेशर को कम करता है। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पादप रोग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल सिंह ने बताया कि विश्व में इस समय 6000 टन औषधीय मशरूम का उत्पादन हो रहा है। जिससे आधा चीन से उत्पादित हो रहा है। आंकडों के अनुसार भारत में औषधीय मशरूम से वार्षिक आय 150 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
बीज तैयार करने की विधि
बीज तैयार करने के लिए लकड़ी का बरुदा और गेहूं के चोकर का प्रयोग किया जाता है। बीज उत्पादन की आवश्यकता अनुसार पांच किलोग्राम लकड़ी का बरुदा, एक किलोग्राम गेहूं का चोकर, रातभर पानी में भिगोकर नम कर दिया जाता है। इसमेें नमी की मात्रा, 65 प्रतिशत होनी चाहिए। इस नम सामग्री में कैल्शियम कार्बोनेट एवं कैल्शियम सल्फेट दो प्रतिशत की दर से मिश्रित कर पांच सौ मिली लीटर पानी में मिलाकर एक तिहाई हिस्सा कोनिकल फलास्क में भरकर कॉटन से उसके मुंह को बंद कर देते है।
खाद तैयार करना
इस मशरूम के लिए गेहूं की भूसी, लकड़ी का बरुदा, चोकर मिलाकर तैयार खाद पर उगाया जाता है। इसके अतिरिक्त लकड़ी का बारुदा एवं चोकर को गन्ने की खोई में मिलाकर खाद तैयार किया जा सकता है। इसमें गेहूं का भूसा, लकड़ी का बरुदा आदि मात्रा में मिलाकर रात में भिगोया जाता है। गेहूं की चोकर को 20 प्रतिशत की दर से अलग पानी में भिगोया जाता है। दूसरे दिन सभी सामग्री से अतिरिक्त पानी को छानकर निकाल देते हैं और पूर्ण रूप से मिश्रित कर ऑटोक्लेव द्वारा निर्जीवीकृत करते हैं। इसको ठंड होने के बाद बुवाई करते है।
ऐसे होती है बुवाई
खाद पदार्थ को बैग में भरकर मुंह को रबर रिंग से बांध देते हैं। उसमें पांच से सात छिद्र कर देते हैं। उसे सुरक्षित जगह पर रख देते हैं। जगह का तापमान 30 से 32 डिग्री सेटीग्रेट रखा जाता है और वहां आर्र्दता 90 प्रतिशत होनी चाहिए। 10 से 15 दिन बाद कवक जाल निकल आते है। कवक जाल पॉलिथीन को काटकर अलग कर देते है। अब इन सभी बैगों को लकड़ी की रैक बनाकर उसके ऊपर रख देते है। सुबह शाम पानी की सिंचाई करना चाहिए।
बाजार मूल्य
इस मशरूम का बाजार मूल्य छह हजार से आठ हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल जाता है।
हमारे एक्सपर्ट
डॉ. गोपाल सिंह
पादप विज्ञान विभाग विभागध्यक्ष
कृषि महाविद्यालय, मोदीपुरम
मोरिंगा पर किसानों के सवाल वैज्ञानिकों जवाब
प्रश्र : मैं सहजन का पेड़ लेना चाहता हूं, कैसे प्राप्त होगा, एक पेड़ कितने रुपये का मिलेगा। -सुभाष मवाना
उत्तर: सहजन के पेड़ बीज से तैयार किए जाते है। ये पेड़ सरदार पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मोदीपुरम से प्राप्त किए जा सकते है। एक पौधे की कीमत तीन से चार रुपये होती है। पौधे की ऊंचाई के हिसाब से कीमतें बढ़ती है।
प्रश्न: मुझे सहजन की खेती के बारे में जानकारी दें ये कितने महीने की फसल हैं। -सुनील कुमार, आलमपुर गनबौर धामपुर बिजनौर
उत्तर: सहजन की खेती जुलाई से सिंतबर माह तक प्रारंभ की जा सकती है। इसकी खेती कम पानी की उपलब्धता में भी की जा सकती है। एक एकड़ में लगभग हजार तक पौधे लगाए जाते है। देश में कई कंपनियां है, जो पत्तियों को खरीद लेती हैं। एक दिन सूखने के पश्चात पत्तियों को 65 से लेकर 75 रुपये किलोग्राम तक कीमत प्राप्त होती है।
प्रश्न : कॉमर्शियल लेवल पर मोरिंगा की खेती के बारे में जानकारी ले सकता हूं। - ओम सिंह पूर्व प्रधान अधिकारी भारतीय तटरक्षक
उत्तर : सहजन की खेती को व्यवसायिक स्तर पर जानकारी के लिए कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. आरएस सेंगर से संपर्क कर पूर्ण जानकारी ले सकते हैं। व्यवसायिक स्तर पर सहजन की खेती से आमदनी अच्छी प्राप्त होती है। इसके लिए पीके एम-2 प्रजाति अच्छी मानी गई है। एक एकड़ खेत में 15 किलो बीज की आवश्यकता होती है। क्योंकि खेती के लिए इसके के बीच घने लगाने पड़ते है। जिससे प्रति एकड़ उत्पादन अच्छा प्राप्त होता है। एक किलो बीज की कीमत 1500 से लेकर 1700 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बाजार में होती है।
प्रश्न: मुझे सहजन की खेती के बारे में जानकारी दें यह कितने महीने की फसल है यह भी बताएं। -देव, बिजनौर
उत्तर: इसकी जानकारी के लिए सरदार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक से बात कर ले सकते हैं और यह फसल एक बार बोने के बाद पांच साल तक ली जा सकती है। खेत में इसके पौधे की ऊंचाई तीन से चार फीट तक रखते हैं और उसमें एक साल में चार बार पत्तियों की कटिंग की जा सकती है। इस प्रकार एक बार पौधा लगाने के बाद इसको पांच से दस साल तक खेत में फसल को खड़ा रखा जा सकता है।
प्रश्न: प्रैक्टिकल जानकारी न होने के कारण किसान नुकसान उठाते है, इसके लिए क्या किया जाए। -डॉ. नौशाद अली हाबिद अली इंचौली मेरठ
उत्तर: कोई भी नयी खेती प्रांरभ करने से पहले वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण प्राप्त कर लेना चाहिए। उसके बाद में ही व्यवसायिक खेती को प्रारंभ करना चाहिए। पहले छोटे स्तर पर खेती प्रारंभ करे, अनुभव होने के बाद उसे बढ़ावा दें।