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चुनाव लड़ने के लिए किया था मनोज का अपहरण

Tue, 23 Feb 2016 02:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ
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शहर के कारोबारी मनोज गुप्ता का देहरादून से अपहरण होने के पीछे की कहानी अब खुलकर आ रही है। मनोज का अपहरण कुख्यात विनय त्यागी ने विधानसभा चुनाव में टिकट लेने और चुनाव लड़ने की व्यवस्था के लिए किया था।
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विनय देवबंद विधानसभा सीट पर एक राष्ट्रीय पार्टी से टिकट मांग रहा था। पुलिस भले ही किसी फिरौती से इंकार कर रही है, लेकिन बताया जा रहा है कि मनोज करीब एक करोड़ रुपये कैश और तीन किलोग्राम सोना देकर छूटकर आया है।
कुख्यात विनय त्यागी सक्रिय राजनीति में कूदने की कोशिशों में है।

ऐसा नहीं कि वह पहली बार चुनाव में उतर रहा है। वर्ष 2007 में भी वह देवबंद सीट पर यूडीएफ से चुनाव लड़ चुका है, जिसमें उसे करीब दो हजार वोट मिले थे। लेकिन इस बार वह एक राष्ट्रीय पार्टी से टिकट लेने की कोशिशों में जुटा है। विनय से जुड़े सूत्रों की मानें तो विनय की इस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता से टिकट के संबंध में बात हुई तो तीन करोड़ रुपये की मांग टिकट के बदले हुई।
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टिकट लेने के साथ ही चुनावी खर्च जुटाने के लिए विनय ने मनोज गुप्ता के अपहरण की पटकथा रच डाली। जिस मोबाइल फोन शॉप के मालिक अंबुज त्यागी ने सिम कार्ड उपलब्ध कराए, वह कोई और नहीं बल्कि विनय त्यागी का भांजा है।

कैश और सोना दोनों साथ
विनय त्यागी ने फिरौती के रूप में दस करोड़ की मांग रखी थी। लेकिन इतना कैश मनोज गुप्ता के पास नही था। ऐसे में सौदेबाजी के बाद कैश और सोना लेने की बात तय हुई। सूत्रों की मानें तो विनय त्यागी को करीब एक करोड़ रुपये कैश और तीन किलोग्राम सोना दिया गया।

सट्टेबाजी से जुड़ा मनोज
मनोज गुप्ता कभी मेरठ में एमसीएक्स का काम करता था। लेकिन जब इस काम को लेकर छापामारी हुई तो उसने करीब 8-9 साल पहले गाजियाबाद में अपना काम जमा लिया था।

बताया जाता है कि मेरठ में उसके पार्टनर रहे कुछ लोगों ने मुखबिरी कर गाजियाबाद के उस समय के एक तत्कालीन एसएसपी पर मनोज और उसके पार्टनरों के ठिकानों पर छापा डलवाया था। जिसमें पुलिस ने करीब एक करोड़ की रिकवरी जुआ खेलने में दिखायी थी।

बसपा के अघोषित समर्थन से मिली जीत
विनय त्यागी ने वर्ष-2006 में पहली बार पत्नी को ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ाया था, जिसमें वह जीत गई थी। वर्ष-2011 में भी उसकी पत्नी बीडीसी सदस्य चुनी गई थी, लेकिन ब्लॉक प्रमुख नहीं बन पाई।
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पिछले माह हुए ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में त्यागी की पत्नी बसपा के अघोषित समर्थन से सपा समर्थित प्रत्याशी को हराने में कामयाब हो गई।
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