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यूपी: फर्जी डॉक्टर के मामले में एक और बड़ा खुलासा, जल्द सामने आएगा असली राज, होगी कार्रवाई

Tue, 13 Jul 2021 10:14 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

जेल जा चुके फर्जी डॉक्टर मनीष कौल के मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जल्द ही इस मामले में भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
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मेरठ में फर्जी डॉक्टर को ले जाती पुलिस। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में जेल गए फर्जी डॉक्टर मनीष कौल की बहन साक्षी कौल की डिग्री पर भी सवाल उठ गए हैं। विवि की जांच में सामने आ चुका है कि साक्षी के एलएलबी में गलत तरह से नंबर बढ़वाकर मार्कशीट बनवाई गई। उसकी थर्ड डिवीजन थी, जबकि नंबर बढ़वाकर उसे सेकेंड डिवीजन कराया गया है। विवि प्रशासन की तरफ से साक्षी को एक नोटिस जारी किया जा चुका है, वह कोई जवाब नहीं दे रही है। विवि प्रशासन उसे दो बार और नोटिस भेजेगा, अगर वो इनका भी जवाब नहीं देती है तो विवि उसकी डिग्री को रद्द कर देगा।

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दिल्ली के मोतीनगर थाना क्षेत्र में रहने वाली बीडीएस डॉक्टर के परिवार वालों ने एक वेबसाइट के जरिए रिश्ता तलाशा था। गाजियाबाद के सन टॉवर शिप्रा सन सिटी इलाके में रहने वाले मनीष की एमबीबीएस की आईडी देखकर उसके परिवार वालों से संपर्क किया। परिवार के लोगों ने बेटे को एमबीबीएस और पिता को एमडी डॉक्टर बताया था। लड़की वालों ने शादी में 50 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए थे।

मनीष कौल का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद पत्नी ने उसके और परिवार के लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। मनीष कौल गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है। उसकी बहन की एलएलबी की डिग्री के बारे में भी शिकायत की गई थी कि वह एलएलबी छठे सेमेस्टर में फेल थी, लेकिन उसने फर्जीवाड़े से नंबर बढ़वाकर पास होने की मार्कशीट बनवा ली। इस मामले को अमर उजाला ने दो जनवरी 2021 को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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मनीष कौल की बहन साक्षी को विवि द्वारा जवाब देने का एक नोटिस भेजा जा चुका है। दूसरा नोटिस भेजने की तैयारी है। रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि अगर तीन नोटिस जारी किए जाने पर भी साक्षी कौल जवाब देने नहीं आती है तो उसकी डिग्री रद्द कर दी जाएगी।

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शादी कराने के लिए बनवा लेते हैं धोखेबाज फर्जी मार्कशीट
फर्जी मार्कशीट और डिग्री सीसीएसयू की जांच में खूब पकड़ी जा रही हैं। इस सबको देखते हुए कुछ लोग तो अपने बेटे या बेटी की शादी करने से पहले प्रमाण पत्रों की खुद भी जांच करा रहे हैं। वे आरटीआई के जरिए नौकरी या कोई दूसरी वजह लिखकर विवि से जानकारी मांग रहे हैं।

सीसीएसयू में हर महीने डेढ़ से दो हजार के बीच डिग्री-मार्कशीट तमाम राज्यों से जांच के लिए आती हैं। एक मार्कशीट या डिग्री की जांच कराने के लिए साढ़े तीन सौ रुपये शुल्क है। इसके बाद विवि प्रशासन अपने रिकॉर्ड में यह जांच करता है कि जो डिग्री आई है, उसका वहां रिकॉर्ड है या नहीं। अगर रिकॉर्ड नहीं मिलता है तो साफ हो जाता है कि उसे किसी ने बाहर कहीं से कंप्यूटर से बनवा लिया है।
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