मेरठ। शहर में अवैध मंडपों और भैसाली बस अड्डे पर हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। पिछले कई महीनों से हाईकोर्ट में इन दोनों महत्वपूर्ण विषयों पर सुनवाई की जा रही है।
शहर में लगने वाले जाम के लिए याचिकाकर्ता सचिन सैनी की जनहित याचिका ने विवाह मंडपों को जिम्मेदार बताया था। इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने एमडीए को सख्त आदेश देते हुए मंडप संचालकों को नोटिस जारी करने सहित कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। लेकिन एमडीए ने मंडप संचालकों पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा कैंट क्षेत्र में स्थित 14 मंडपों पर भी तलवार लटक गई है। इन मंडपों पर भी हाईकोर्ट फैसला सुना सकता है।
इसके अलावा भैसाली अड्डे को शहर से बाहर करने को लेकर भी सुनवाई होगी। इस मामले में भी एमडीए, रोडवेज और जिला प्रशासन के बीच बैठक कर मिनट्स तैयार किए गए हैं। पिछली बार की सुनवाई में दोनों मामलों को 21 अगस्त तक टाल दिया गया था। इस बार उम्मीद की जा रही है मंडपों और बस अड्डे पर हाईकोर्ट से फैसला आ सकता है। हालांकि, एमडीए का कहना है कि मुफ्त में जमीन देने के लिए वह तैयार नहीं है। इसके लिए रोडवेज को भैसाली बस अड्डे के लिए जमीन के लिए धन खर्च करना होगा। वहीं, रोडवेज अधिकारियों का कहना है कि पांच करोड़ की लागत से बस अड्डे को तैयार किया गया है। एनजीटी के नियमानुसार बसों का संचालन किया जा रहा है। रोडवेज के मेरठ रीजन के आरएम नीरज सक्सेना का कहना है कि अधिकतर बसों को सीएनजी कर दिया गया है। वहीं, सड़क पर जाम न लगे इसके लिए रोडवेज कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर बसों को अड्डे के अंदर खड़ा करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।