फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मलेरिया विभाग खुद बीमार क्या करेगा उपचार

Tue, 25 Apr 2017 12:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
मलेरिया विभाग लंबे समय से शासन की उदासीनता का दंश झेल रहा है। न स्टाफ पूरा है, न दवाएं और न ही गाड़ियां। रिमाइंडर पर रिमाइंडर शासन को भेजे जाते हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं होती। हर साल मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसके  बावजूद विभाग के पास उपचार के लिए पुख्ता बंदोबस्त नहीं हैं।
विज्ञापन


सात साल से कीट संग्रहकर्ता के दो पद खाली चल रहे हैं, जबकि मानक के हिसाब से यहां छह कीट संग्रहकर्ता होने चाहिए। 80 के दशक में यहां दवा छिड़कने वालों की संख्या 66 हुआ करती थी, जो अब 14 पर सिमट कर रह गई है। यह हालात तब हैं, जब उस समय के मुकाबले मेरठ की जनसंख्या करीब सात गुना बढ़ चुकी है। पहले विभाग के पास तीन गाड़ियां थीं। कई साल पहले दो खराब हो गई थीं। उन्हें नीलाम कर दिया गया। अब एक गाड़ी है, टाटा सूमो। यह पिछले साल दिसंबर माह से प्रशासन केपास है। जिला मलेरिया अधिकारी योगेश कुमार सारस्वत का कहना है कि इस बारे में वह कई बार सीएमओ को पत्र लिख चुके हैं। सीएमओ ने डीएम को पत्र भेजा, मगर कोई असर नहीं हुआ। ऐसे में खासतौर पर देहात में दवाएं रखकर ले जाने वाले वाहन का संकट है।

मलेरिया के मामले
वर्ष         सैंपल लिए गए     पॉजिटिव केस
2014         41991                 85
2015         65928                194
2016         68220                211

2008 से मनाया जाता है विश्व मलेरिया दिवस
विश्व मलेरिया दिवस हर साल 25 अप्रैल को मनाया जाता है। मलेरिया एक मच्छर जनित गंभीर बीमारी है। यह प्रचलित संक्रामक रोगों में से एक है। इस रोग से हर साल विश्वभर में करोड़ों लोग प्रभावित होते हैं, जिनमें लाखों लोगों की इस रोग से मृत्यु तक हो जाती है। इस जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ही मलेरिया दिवस बनाया जाता है। विश्व मलेरिया दिवस की शुरुआत 25 अप्रैल 2008 से हुई थी।
विज्ञापन


कैसे होता है मलेरिया
मलेरिया मादा एनाफ्लीज मच्छर के काटने से फैलता है। एनाफ्लीज रुके हुए साफ पानी में प्रजनन करता है। मलेरिया का संक्रमण काल माह जुलाई से अक्तूबर तक चलता है। मलेरिया के रोगी को तेज ठंड व कंपकंपी के साथ एक दो या तीन दिन के अंतराल पर तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द रहता है। बहुत अधिक पसीने के साथ बुखार उतर जाता है।

यह बरतें सावधानियां
घर और आसपास साफ पानी जमा न होने दें।
कूलर व पानी की टंकी सप्ताह में एक बार खाली करके उसे सुखा कर दोबारा प्रयोग करें।
शरीर के अधिकांश भाग को ढकने वाले कपड़े पहनें।
सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
दिन छिपने के समय खिड़की और दरवाजे बंद रखें।
बुुखार आने पर मलेरिया के लिए खून की जांच कराएं।
पॉजिटिव घोषित होने पर चिकित्सक की देखरेख में उपचार लें।

मच्छर भगाने वाली क्वाइल और लिक्विड सेहत के लिए खतरनाक
मच्छर भगाने के लिए बाजार में क्वाइल, लिक्विड, पेपर, तेल और स्प्रे आदि मिलते हैं। ये सभी किसी न किसी रूप में शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। डॉक्टर अजीत कुमार बताते हैं क्वाइल में बेंजो पायरेंस, बेंजो फ्लूओरोथेन जैसे तत्व निकलते हैं। इससे सांस लेने में दिक्कत आती है। इससे फेफड़ों पर गलत असर पड़ता है। अस्थमा होने का डर रहता है। साथ ही बच्चों में लगातार घबराहट बने रहने का कारण भी बन सकता है। यही पेपर और लिक्विड से होता है। स्प्रे और तेल से स्किन और आंखों पर खराब असर होता है। आंखों में जलन की समस्या शुरू हो जाती है। सबसे सुरक्षित उपाय मच्छरदानी ही है।

जट्टीवाड़ा में किया एंटी लार्वा स्प्रे
मेरठ। जिला मलेरिया टीम ने सोमवार को जट्टीवाड़ा की नालियों में एंटी लार्वा स्प्रे किया। जिला मलेरिया अधिकारियों ने बताया कि अब अभियान चलाकर स्प्रे और फॉगिंग कराई जाएगी। टीमों का गठन कर दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें