हस्तिनापुर। पूर्वजों को मोक्ष दिलाने वाला कार्तिक पूर्णिमा का पर्व हिंदू धर्म में आस्था का प्रतीक है। इसलिए यह पर्व हर घर में मनाया जाता है। इसके चलते कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले से महीने पूर्व ही श्रद्धालु इसकी तैयारी शुरू कर देते हैं।
श्रद्धालु गंगा में स्नान कर पुण्य कमाने के लिए इस कदर उल्लास में भरे होते हैं कि लगातार पांच दिनों तक अपने घर और खेतीबाड़ी की चिंता छोड़कर पतित पावनी गंगा के किनारे पर कड़कड़ाती ठंड में रहकर आस्था और श्रद्धा के चलते मां गंगा की पूजा-अर्चना करते हैं। मन में गंगा मैया के दर्शन और प्रतिदिन पुण्य कमाने की लालसा लेकर अगले पांच दिनों तक गंगा घाट की ओर बढ़ेंगे।
क्षेत्र में मखदूमपुर और हस्तिनापुर बूढ़ी गंगा मेला सदियों से लगता आ रहा है। मेला आस्था, श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। इसलिए श्रद्धालु पतित पावनी में सूर्य की किरण निकलने से पहले ही स्नान का पुण्य कमाने के लिए गंगा तट पर डेरा डाल देते हैं। इस समय चीनी मिल शुरू हो गए हैं। गेहूं की बुवाई के लिए गन्ने की फसल काटकर खेत खाली करने की जल्दी है, परंतु कार्तिक पूर्णिमा मेले की आस्था के सामने सभी कार्य पीछे छूट गए हैं। मेले के उल्लास में डूबे श्रद्धालुओं ने घर और खेतीबाड़ी की चिंता त्याग दी है और गंगा किनारे डेरे डालने शुरू कर दिए हैं। (संवाद)
चढ़ने लगा आस्था का रंग
मखदूमपुर कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेला इस बार 11 से 15 नवंबर तक लगेगा। अभी से ही गंगा घाट और आसपास के क्षेत्र में आस्था का रंग चढ़ने लगा है। ऐतिहासिक गंगा घाट पर स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने शुरू हो गए हैं। गंगा किनारे टेंट का शहर बसाया जा रहा है।
मेले में बढ़ने लगी रौनक
श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से मेला परिसर की रौनक भी बढ़ने लगी है। रविवार की छुट्टी होने के कारण मेले का शुभारंभ होने से पहले ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। जगह-जगह टेंट लगाकर शेड बनाई गई है। प्रशासनिक अफसरों के लिए अलग से व्यवस्था की गई है।