महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर विशेष
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मेरठ से खास लगाव रहा है। वे कई आर मेरठ आए और यहां के युवाओं को उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने को कहा। पहली बार वे 1920 में मेरठ आए। यहां पर रात्रि प्रवास किया और चार जगहों पर उन्होंने सभाएं की।
इतिहासकार डॉ. केडी शर्मा बताते हैं कि 1920 में जब महात्मा गांधी पहली बार मेरठ आए तो रेलवे रोड चौराहे पर लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। उन्हें देखने के लिए शहर के अलावा गांवों से भी बड़ी संख्या में युवा पहुंचे थे। यहां से वे टाउन हॉल पहुंचे और सभा की। सभा में बहुत भीड़ थी। इसके बाद वे जिमखाना मैदान गए। जिमखाना को तब बर्फखाना कहा जाता था। यहां पर सभा करने के बाद वे मेरठ कॉलेज गए और छात्रों से मुलाकात की।
इसके बाद उन्होंने कॉलेज में मौजूद वट वृक्ष के नीचे यज्ञ में भी भाग लिया। इसके बाद गांधी जी वेस्ट एंड रोड पर, जहां अब कैशल व्यू है। वहां पर स्थित नवाब इस्माइल के यहां पहुंचे। रात्रि में यहीं पर ठहरे। इसके बाद गांधी जी 1929 में दोबारा मेरठ आए। मेरठ कॉलेज में जाकर उन्होंने छात्र-छात्राओं से आजादी के आंदोलन में शामिल होने का आह्वान लिया।
डॉ. केडी शर्मा बताते हैं कि इसके बाद वे मेरठ में आते रहे। मेरठ का जिक्र वे देश के तमाम शहरों में जाने के दौरान करते थे। मेरठ कॉलेज में इस वट वृक्ष को देखने के लिए बाहर से भी लोग आते हैं जहां गांधी जी ने शिक्षकों के साथ मंत्रणा की।
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