मतगणना के दिन हंगामा करने में गिरफ्तार बसपा कार्यकर्ताओं से जिला जेल में मिलने पहुंचे पूर्व विधायक और महापौर के पति योगेश वर्मा के लिए जेल कर्मचारियों ने जेल का बड़ा गेट खोल दिया। इसको लेकर चर्चाओं के बीच जब शिकायत हुई तो नियमों के विपरीत गेट खोले जाने पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने जांच कराने की बात कही है।
1 दिसंबर को मतगणना के बाद बसपा महापौर प्रत्याशी की जीत की खुशी में बसपा कार्यकर्ता कताई मिल के बाहर हंगामा कर रहे थे। इस दौरान पुलिस फोर्स पर पथराव होने पर फोर्स ने लाठीचार्ज करते हुए बसपा के दस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। हालांकि इनमें से आठ आरोपियों को जेल भेज दिया गया था।
मंगलवार को पूर्व विधायक बसपा योगेश वर्मा जेल में बंद इन कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे। उनके साथ बसपा नेता शाहजहां सैफी, राजन वर्मा आदि थे। लेकिन योगेश वर्मा अकेले ही जेल के भीतर गए। जेल कर्मचारियों ने योगेश वर्मा के लिए जेल के गेट की खिड़की न खोलकर पूरा गेट ही खोल दिया। जबकि नियमानुसार सामान्य मुलाकाती को खिड़की से ही प्रवेश दिया जाता है।
ये है बड़ा गेट खोलने का नियम
जेल का पूरा गेट यानी बड़ा गेट प्रोटोकॉल के तहत किसी मंत्री, सांसद, विधायक, महापौर के साथ ही शासन, प्रशासन और पुलिस के बड़े अधिकारियों के लिए ही आने-जाने के दौरान खुलता है। इसके अलावा यदि कोई हाई सिक्योरिटी वाला अपराधी जेल में बंद है, तो उसे भीतर से ही गाड़ी में बैठाकर लाया जाता है, जिसके बाद पूरा गेट खोलकर गाड़ी को बाहर किया जाता है। लेकिन योगेश वर्मा पूर्व विधायक हैं, जो इस श्रेणी में नहीं आते हैं।
महापौर बताकर खुलवाया गेट
वरिष्ठ जेल अधीक्षक बीडी पांडे ने इस संबंध में बताया कि उनके संज्ञान में पूरा मामला आ चुका है। इस पर जांच हो रही है। अभी तक पता चला है कि महापौर बताकर गेट खुलवाया गया था। लेकिन जो हुआ है वह गलत है। भविष्य में इस पर ध्यान दिया जाएगा।
मेरा कोई सरोकार नहीं
इस पूरे प्रकरण पर बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा का कहना है कि मैं तो पूर्व विधायक की हैसियत से कार्यकर्ताओं से मिलने गया था। अब जेल कर्मचारी पूरा गेट खोलें या खिड़की, इससे मेरा कोई सरोकार नहीं है।