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इस्लामी समाज में मदरसे पावर हाउस के समान : उलमा

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अजराडा मे हुसैनिया मदरसें के 106वें वा​र्षिक जलसे मे उमेला मुगैसी जलसे को सम्बो​धित करते हुए। स
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जामिया गुलजारे हुसैनिया अजराड़ा के 106वां वार्षिक जलसे की तीसरी सभा का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
माछरा (मेरठ)। इस्लामी समाज में मदरसे पावर हाउस के समान हैं और हमारे संबंध पावर हाउस से जुड़े हुए हैं। इनके कारण हर घर में रोशनी पहुंचती है। उलमाओं ने मेहनत कर मदरसों को स्थापित किया। यह विचार बृहस्पतिवार को जामिया गुलजारे हुसैनिया अजराड़ा के 106वें वार्षिक जलसे की तीसरी सभा को संबोधित करते हुए मुहतमिम दारुल उलूम देवबंद के मौलाना मुफ्ती अब्दुल कासिम नौमानी ने व्यक्त किए।
उन्होंने मदरसों के महत्व पर रोशनी डालते हुए बताया कि हमें शिक्षा हासिल करनी चाहिए जिससे हम इस्लामी संस्कृति और सभ्यता को अपनाकर अपने जीवन को सफल बना सकें। जामिया के मुहतमिम हकीम मौलाना अब्दुल्लाह मुगीसी ने कहा कि मदरसा इन्सान को इन्सान बनाने की जगह है। यहां से मानव एकता और भाईचारे का संदेश जाता है। ये जलसा भी हिंदू-मुस्लिम एकता का लगभग सौ वर्ष से प्रतीक बना हुआ है। उन्होंने मानवता कायम करने पर अधिक जोर दिया।
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दारुल उलूम नदवतुल उलेमा लखनऊ के अहम उस्ताद खालिद फैसल ने नमाजों की पाबंदी करने और कुरान की शिक्षाओं का पालन करने का संदेश दिया। मुफ्ती मोहम्मद इमरान कासमी ने शिक्षा के अतिरिक्त सदव्यवहार पर अपने विचार रखे। मौलवी मोहम्मद अहमद चांदपुरी ने नात-ए-पाक पेश की। मुहम्मद अनस अररयावी ने तराना सुनाया। मुहतमिम जामिया मौलाना हकीम मुहम्मद अब्दुल्लाह मुगीसी की सामूहिक दुआ पर जलसे का समापन हुआ। मौलाना आस मोहम्मद गुलजार कासमी ने संचालन किया।
जलसे की दूसरी सभा में दारुल उलूम वक्फ देवबंद के मुहतमिम मौलाना मोहम्मद सुफियान कासमी, दारुल उलूम देवबंद के उस्ताद मौलाना मुफ्ती मुनीरुद्दीन कासमी नाजिम तंजीम ओ तरक्की, मौलाना राशिद हुसैन कासमी ने सविस्तार दीन की बातें बताईं। मौलाना अनीस अहमद कासमी बलग्रामी ने बताया कि इस धरती पर नीले गगन तले अल्लाह हमें अपनी नियामतों से नवाजता है लेकिन ये सब छुपकर आती हैं।
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संचालन इस पारंपरिक रूप से मौलाना आस मोहम्मद गुलजार कासमी ने किया जबकि मुहतमिम जामिया मौलाना अब्दुल्लाह मुगीसी की सामूहिक दुआ पर लगभग दोपहर 12 बजे जलसे की इस सभा का समापन हुआ जिसमें लोगों ने तनमन से शिरकत की।
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