इसे लेकर पांच दिनों तक लगातार अपने घर के बाहर धरने पर बैठ कर अपने पुत्र के शव की मांग करने वाले रूपक की मां की गूंज प्रशासन तक पहुंची तो कमिश्नर अनीता सी मेश्राम के आग्रह पर यूपी शासन ने केंद्र सरकार को भेजे प्रस्ताव के बाद सुरंग बनाने वाली टीबीएम मशीन को यहां पहुंचाने की मंजूरी दे दी थी।
लेकिन यहां दो सौ टन वजनी व लंबी मशीन पहुंचने के लिए रास्ता नहीं होने के कारण 12 अगस्त से रास्ता बनाया जा रहा था। जिसके बाद यहां गाजियाबाद से एनडीआरएफ की टीम व मेट्रो ट्रेन की पटरी की खुदाई करने वाली टीबीएम मशीन पहुंचनी थी। इसके बाद ही ऑपरेशन रूपक दोबारा से शुरू किया जाना थी।
दो सौ टन वजनीं व लंबी टीबीएम मशीन बुधवार को ट्राला में सवार होकर यहां पहुलंरची, लेकिन बुधवार को ही अचानक हुई तेज मूसलाधार बारिश में मशीन पहुंचाने के लिए बनाए गया 12 फीट चौड़ा और 50 मीटर लंबा रास्ता बारिश के कारण ध्वस्त होकर बह गया। जिसके बाद टीबीएम मशीन घटनास्थल पर नहीं पहुंच पाई और उसे बीच में ही रास्ते में रोकना पड़ा। मशीन को घटनास्थल तक पहुंचने के लिए अब रास्ता दोबारा से तैयार किया जाएगा।
यह भी पढ़ें: World photography day: फोटोग्राफी का बेहतरीन नमूना हैं स्मार्टफोन से ली गईं ये शानदार तस्वीरें
निरीक्षण में बताया गया कि रास्ते की चौड़ाई कम होने और बारिश के कारण बह जाने के कारण अब सूखी मिट्टी मंगाकर दोबारा से रास्ते की चौड़ाई बढ़ाने के साथ मजबूत तरीके से बनाया जाएगा। ताकि भारी-भरकम मशीन को बिना किसी नुकसान के घटनास्थल तक आराम से पहुंचा जा सके। तेज बारिश ने यूपी व केंद्र सरकार के चल रहे ऑपरेशन रूपक पर एक बार फिर पानी फेर दिया और भारी बारिश के कारण पहले की तरह इस बार भी ऑपरेशन रूपक को रोकना पड़ा।
थाना प्रभारी निरीक्षक रोहटा उपेंद्र सिंह ने बताया कि टीबीएम मशीन को रास्ते में ही रोक दिया गया है तथा दोबारा से रास्ते का सही ढंग से निर्माण कर मशीन को घटनास्थल पर पहुंचाने को युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है।
इंस्पेकटर बिजेन्द्र पाल राणा ने बताया कि ऑपरेशन रूपक को जारी रखने के लिए एनडीआरएफ की टीम भी तैयार है तथा मशीन पहुंच चुकी है। लेकिन बारिश में रास्ता का किनारा क्षतिग्रस्त होने के कारण ऑपरेशन बीच में ही रोकना पड़ा है।