अच्छे मानसून की आस लगाए बैठे किसानों पर मानसून की बेरुखी भारी पड़ सकती है। कम बारिश से धान की फसल पर संकट बढ़ रहा है। अभी तक जुलाई माह में मूसलाधार बारिश नहीं हुई है। इससे किसानों के साथ-साथ वैज्ञानिक भी चिंतित हैं।
वेस्ट यूपी के किसान गन्ने के साथ धान की भी खेती करते हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने इस बार अच्छी बारिश होने के आसार जताए थे। लेकिन जुलाई माह बीतने को है और अभी सामान्य से भी करीब 40 से 45 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मेरठ ही नहीं आसपास के जिलों सहारनपुर, बिजनौर, शामली, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, गौतमबुद्वनगर, बागपत आदि में भी कम बारिश हो रही है। प्री मानसून बारिश के बाद अभी तक जुलाई में अच्छी बारिश नहंी हुई है। धान की बुवाई का समय लगभग पूरा हो गया है। बारिश न होने से किसानों को सिंचाई के लिए नलकूप और नहरों का सहारा लेना पड़ रहा है। सोमवार को मौसम का मिजाज ऐसा ही रहा। शहर के कुछ हिस्सों में बादल बिना बरसे ही चले गए। जबकि कुछ स्थानों पर तेज बारिश हुई। मौसम वेधशाला पर सोमवार को अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री व न्यूनतम तापमान 25.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। बारिश 24.3 मिलीमीटर रिकार्ड की गई। एक दिन पहले की तुलना में तापमान में 2.7 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई।
बारिश के लिए नहीं बन पा रहा सिस्टम
अभी तक जुलाई में बहुत कम बारिश हुई है। अच्छी बारिश के लिए यहां पर सिस्टम नहीं बन पा रहा है। इस कारण से क्षेत्रवार बारिश हो रही है। क्षेत्रवार बारिश ठीक नहीं है। जुलाई माह में औसतन बारिश 40 से 45 प्रतिशत तक कम है। आने वाले दिनों में अच्छी बारिश के आसार हैं।
डॉ. एन. सुभाष, मौसम वैज्ञानिक, आईआईएफएसआर
कम बारिश से उत्पादन पर असर
धान की बुवाई से लेकर कटाई तक पानी की जरूरत पड़ती है। बुवाई के समय पानी भरा रहना चाहिए। धान की फसल में सबसे ज्यादा लाभ बारिश का मिलता है। ट्यूबवेल से कितना भी पानी दे दो, उससे इतना लाभ नहीं मिलता है। अगर बारिश कम होगी तो इसका असर उत्पादन पर भी पड़ता है। धान की फसल वेस्ट यूपी में अधिक होती है, इसलिए अच्छी बारिश जरूरी है।
डॉ. रितेश शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी बीईडीएफ