माधुरी भवन पर एमडीए कर्मियों ने ऐसा करम दिखाया कि जून में सील लगाकर भूल गए। दो बार ध्वस्तीकरण की तारीख तय की परंतु कार्रवाई नहीं हुई। उधर, यहां लगी सील भी गिर गई। इस पर मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार ने तत्कालीन जेई के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि के निर्देश दिए हैं। वहीं, इसके लिए जिम्मेदार एमडीए अधिकारियों और कर्मचारियों का नाम तय कर कार्रवाई के लिए वीसी को पत्र लिखा है।
दिल्ली रोड स्थित माधुरी भवन बैंक्वेट हॉल अनाधिकृत रूप से बना है। इसका मानचित्र स्वीकृत नहीं है। कमिश्नर को शिकायत मिली तो उन्होंने कार्रवाई केनिर्देश दिए। इस पर जून में सील लगा दी गई। उधर, बैंक्वेट हॉल स्वामी ने नक्शा स्वीकृत करने की अर्जी डालकर शमन शुल्क हेतु एमडीए में आवेदन कर दिया। उसने शपथपत्र के साथ यह आवेदन किया कि यदि व्यावसायिक संभव नहीं तो उसका आवासीय नक्शा स्वीकृत कर दिया जाए। जून से अब तक इस प्रकरण का निस्तारण नहीं हुआ है जबकि दो बार ध्वस्तीकरण के निर्देश हो चुकेहैं। उधर, यहां लगी सील भी गिर गई है।
मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार ने इस प्रकरण में सख्ती दिखाई। उन्होंने कहा कि केवल शपथ पत्र पर भवन को समायोजित करना पर्याप्त आधार नहीं है। यह प्रकरण इतने समय से क्यों लंबित रहा इसकी जिम्मेदारी तय की जाए। मंडलायुक्त के मुताबिक इस भवन का अशमनीय भाग अब तक ध्वस्त हो जाना चाहिए था जबकि दो बार ध्वस्तीकरण के आदेश भी हुए हैं। उन्होंने तत्कालीन जेई प्रदीप कुमार को इस लापरवाही में प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने एमडीए वीसी को लिखे पत्र में अन्य की जिम्मेदारी तय करके तीस नवंबर तक प्रकरण का निस्तारण करने का निर्देश दिया।