छठे नवरात्र पर बड़ा आकार लेती है मां काली की मूर्ति
मेरठ। सदर स्थित सिद्धपीठ मां काली मंदिर नवरात्र में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना है। करीब 400 वर्ष पुराने मंदिर को लेकर मान्यता है कि छठे नवरात्र में मां काली की रूप अन्य दिनों के मुकाबले बड़ा हो जाता है। मां का यह स्वरूप नवमी तक रहता है। सच्चे मन से जो मुराद मांगी जाती है, वह यहां पूरी होती है। प्रत्येक शनिवार को श्रद्धालु चुनरी, श्रृंगार का सामान, नारियल चढ़ाने और दीपक जलाने के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में मनोकामना के लिए धागा बांधा जाता है।
मंदिर के मुख्य पुजारी सोनकेत बैनर्जी ने बताया कि बताया जाता है कि यहां पहले श्मशान था और लोग मन्नत मांगते थे। धीरे धीरे यहां पूजा अर्चना होने लगी। बाद में यहां पर मां काली की मूर्ति की विधि विधान से पूजा आरंभ की और मंदिर की स्थापना की गई।
कोई खाली हाथ नहीं लौटता
- प्रत्येक शनिवार के अलावा नवरात्र में यहां श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए आते हैं। मान्यता है कि मां के दरबार से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता। - ऋषि गुप्ता, श्रद्धालु
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आस्था से भरती है झोली
- मां की पूजा-अर्चना से ही समस्या दूर हो जाती है। सदर बाजार में खरीदारी के लिए आने वाले लोग मंदिर में दर्शन करने जरूर आते हैं। - गोल्डी, श्रद्धालु
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मंदिर में मिलती है मन की शांति
- मां काली की पूजा से भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं। देवी मंदिर में प्रवेश करते ही मन को शांति मिलती है। - वंशिका, श्रद्धालु
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