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LPG Crisis: शहर में फूड कारोबार पर संकट, गांव से मंगवा रहे सिलेंडर, उपलों और कोयले पर बन रही बिरयानी

Sat, 11 Apr 2026 12:36 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

LPG Shortage: मेरठ में गैस सिलेंडर की किल्लत से स्ट्रीट फूड वेंडरों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। कई ठेले बंद हो गए हैं और कई वेंडर कोयले, लकड़ी और उपलों पर चाट, बिरयानी व अन्य व्यंजन बनाने को मजबूर हैं।

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लकड़ी से तंदूर जलाकर खाना पकाते फूड वेंडर्स। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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मेरठ शहर में गैस सिलेंडर की किल्लत ने स्ट्रीट फूड वेंडरों का बजट बिगाड़ दिया है। कॉमर्शियल गैस उपलब्ध न होने और घरेलू सिलेंडर की सीमित आपूर्ति के कारण कई वेंडरों ने अपने ठेले बंद कर दिए हैं। जो लोग काम कर रहे हैं, वे अब कोयले, लकड़ी और उपलों की भट्टी पर चाट, बिरयानी, छोले और राजमा-चावल बनाने को मजबूर हैं।

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जानकारी के अनुसार घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति करीब 24 दिन के अंतराल पर हो रही है, जबकि बाजार में 910 रुपये का सिलेंडर ब्लैक में 2000 से 2500 रुपये तक बिक रहा है। इससे छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ गई है और उनकी रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है।

परतापुर से मोहकमपुर के बीच चाय, बिरयानी और छोले-चावल के करीब 30 ठेले बंद हो चुके हैं। वहीं चाट और मुरादाबादी दाल बेचने वाले वेंडर अब गर्मी बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि वे शिकंजी, जलजीरा और बेल के शर्बत का ठेला लगा सकें।
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उपलों और कोयले पर बन रही बिरयानी
नई बस्ती निवासी अब्बास स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के पास बिरयानी का ठेला लगाते हैं। उन्होंने बताया कि अब घर पर उपलों और कोयले पर वेज बिरयानी तैयार करनी पड़ रही है। ठेले पर पांच किलो का सिलेंडर केवल गर्म करने के लिए इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब वह भी मुश्किल से मिल रहा है। आसपास कई चाय और चाट के ठेले बंद हो चुके हैं।

रिश्तेदारों से सिलेंडर लेकर चल रहा काम
शिवपुरम निवासी महेश कुमार का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के पास चाट और मुरादाबादी दाल का ठेला है। उन्होंने बताया कि फिलहाल पड़ोसियों और रिश्तेदारों से घरेलू सिलेंडर मांगकर किसी तरह काम चला रहे हैं। घर पर लकड़ी और कोयले की भट्टी लगा दी है, लेकिन महंगाई के कारण कई लोगों ने फास्ट फूड का काम ही बंद कर दिया है।

लागत बढ़ी, मुनाफा लगभग खत्म
देवतापुरम निवासी ओमवीर दिल्ली रोड स्थित ध्यानचंद नगर के पास बिरयानी का ठेला लगाते हैं। उन्होंने बताया कि ब्लैक में सिलेंडर 2500 रुपये तक मिल रहा है, जिससे लागत काफी बढ़ गई है। इसके बावजूद ग्राहकों को बनाए रखने के लिए प्लेट की कीमत अभी भी 20 से 30 रुपये ही रखी है। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो वे शिकंजी या जलजीरा का ठेला लगाने को मजबूर होंगे।

गांव से मंगवा रहे सिलेंडर
शिवपुरम निवासी मोहित और उज्ज्वल शॉप्रिक्स मॉल के पास छोले-राजमा चावल का स्टॉल लगाते हैं। उन्होंने बताया कि वे गांव से सिलेंडर मंगवा रहे हैं, जो 910 की जगह करीब 1500 रुपये में मिल रहा है। वहीं घर पर खाना बनाने के लिए उपले और कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है।

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शहर में स्ट्रीट फूड कारोबार पर संकट
कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत और घरेलू सिलेंडर की निर्धारित समय अवधि के कारण शहर में स्ट्रीट फूड कारोबार पर संकट गहराता जा रहा है। कंकरखेड़ा, गंगानगर, जागृति विहार और गढ़ रोड जैसे इलाकों में भी कई स्ट्रीट फूड वेंडरों ने अपने ठेले बंद कर दिए हैं। छोटे व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो शहर के स्ट्रीट फूड कारोबार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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