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ये मोहब्बत नहीं, प्यार-हवस-धोखे का खेल, एक क्लिक में पढ़ें पूरी खबर

Sun, 17 Dec 2017 03:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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प्यार में धोखा
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मोहब्बत की आड़ में युवतियां प्यार-हवस और धोखे का शिकार हो रही हैं। सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा करने वाले आशिक प्रेमी ही प्रेमिका को बदनामी के मुहाने पर लाकर छोड़ रहे हैं। इससे पुलिस की भागदौड़ तो बढ़ी ही है, साथ में समाज के ताने-बाने पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। 
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मोहब्बत की आड़ में प्यार-हवस और धोखे का खेल बढ़ गया है। इसमें कम उम्र और परिवार के खिलाफ जाने वाले जोड़े अधिक शामिल हैं, जिस प्रेमी के साथ सात जन्मों का बंधन निभाने का वादा हो रहा है, वही समाज में प्रेमिका को बदनामी के मुहाने पर छोड़ रहा है। जिले में दो दिन के भीतर आए इस तरह के दो केस उदाहरण के लिए काफी हैं। ऐसे में पुलिस की भागदौड़ होने के साथ ही सामाजिक ताना-बाना भी प्रभावित हो रहा है। परिवार से हटकर जाने वाले युवाओं को परिजन भी अनहोनी के बाद स्वीकारने के लिए तैयार नहीं हैं। 

रिश्तों की मर्यादा भी टूटी 
कई केस ऐसे सामने आए हैं, जिनमें रिश्तों की मर्यादा का ख्याल नहीं रखा गया है। कहीं बहन का देवर कसूरवार बना है तो कहीं रिश्तेदार ने ही कलंक लगा दिया। कुल मिलाकर इस तरह के कृत्यों से सामाजिक स्तर भी परिवारों के बीच दूरियां बढऩे के साथ दुश्मनी पैदा हो रही है।
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केस एक

प्यार में धोखा
नईमंडी निवासी एक युवती का उसके बहन के देवर ने प्रेमजाल में फंसा लिया और शादी कर ली। हालांकि विवाह के कुछ दिनों तक सही रहा। मोहब्बत का नशा उतरते ही युवक का चेहरा भी बेनकाब हो गया। प्रेमी से पति बने युवक ने पहले युवती का यौन शोषण किया, बाद में उसकी वीडियो बना ली। उसे गर्भवती कर धोखा देकर युवक दुबई भाग गया। अब युवती को उसके परिजत्भी स्वीकारने के लिए राजी नहीं हैं। 

केस दो:
बागपत के रमाला के रहने वाले समीर का शाहपुर में अपने रिश्तेदार के यहां आना-जाना था। इसी बीच उसने पड़ोस की युवती को प्रेमजाल में फंसा लिया। सात जन्मों का वादा कर उसकी अस्मिता से खिलवाड़ किया। प्यार चरम पर पहुंचा तो प्रेमी हवस का शिकार बना धोखा देकर रफूचक्कर हो गया। अब पीड़िता के साथ परिवार का भी मान कलंकित हुआ है। आरोपी ने उसके यौन-शोषण की वीडिय़ो भी बनाई। 

समाज में सांस्कृतिक चेतना की जरूरत
डीएवी कॉलेज के समाजशास्त्र के पूर्व एचओडी डॉ कलम सिंह कहते हैं कि वर्तमान वातावरण में युवाओं के पास कोई कार्य नहीं है। माता-पिता लड़की पर ध्यान देने के साथ लड़कों पर नजर रखें, लेकिन ऐसा नहीं हो पाता है। परिवार, समाज से हटकर कार्य करने वाले अधिकांश मामले अधिक दिन नहीं टिकते हैं। पहले युवाओं को अपने करियर पर ध्यान देना होगा। समाज में सांस्कृतिक चेतना की जरुरत है। 

बच्चों को समझाएं अभिभावक 
एसपी सिटी ओमबीर सिंह ने बताया कि इस तरह के केस आने से पुलिस की अधिक टेंशन बढ़ती है। हालांकि जो भी केस आए हैं, उनमें कार्रवाई की गई है। लेकिन, इससे पहले अभिभावकों को भी बच्चों के प्रति जागरूक और सतर्क रहने की जरूरत हैं, तभी ऐसे मामले रोके जा सकते हैं।

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