भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
पश्चिमी यूपी से ताल्लुक रखने वाले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के मार्गदर्शन और क्षेत्रीय अध्यक्ष सतेंद्र सिसोदिया के नेतृत्व में चुनावी मैनेजमेंट का नतीजों पर असर दिखा है। पश्चिमी यूपी में मेरठ सीट एक चुनौती थी।
2017 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को भरसक प्रयास के बावजूद यहां हार का सामना करना पड़ा था। इसी तरह सहारनपुर मेयर की सीट पर पहले दिन से ही कड़ा मुकाबला माना जा रहा था।
यह भी पढ़ें: UP Nikay Chunav: मेरठ में टूटा मिथक... जिसकी प्रदेश में सत्ता उसका बना महापौर, दिनेश खटीक की बहन भी जीतीं
मेरठ में भाजपा ने इस बार रणनीति बदली। ये चुनाव बिना किसी ध्रुवीकरण के लड़ा गया। न तो तूफानी भाषण हुए, न ही बड़े पैमाने पर प्रचार। ये सोची-समझी रणनीति थी। इसका नतीजा ये हुआ मुस्लिमों में प्रतिक्रियात्मक ध्रुवीकरण नहीं हुआ।
बहुजन समाज पार्टी जिस तरीके से चौथे नंबर पर रही, उससे साफ है कि भाजपा संगठन ने मेरठ में दलित वोट पर भी अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखी। सहारनपुर के बारे में भी यही माना जा रहा है कि करीबी मुकाबले के बावजूद भाजपा का विजयी वोट दलित वर्ग से आया है। जो दलित राजनीति के गढ़ सहारनपुर में बहुत बड़ी बात मानी जा रही है।
हरिकांत अहलूवालिया, महापौर मेरठ
- फोटो : अमर उजाला