श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में आयोजित महापुराण श्रीमद्भागवत कथा में दत्तात्रेय का प्रसंग सुनाया
संवाद न्यूज एजेंसी
किठौर। महापुराण श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिवस श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में कथा सुनाते हुए डॉ. रामप्रकाश शास्त्री ने भगवान श्री दत्तात्रेय का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने बताया कि भगवान दत्तात्रेय ने अपने जीवन काल में 24 गुरु बनाए। भागवत में वर्णन है कि शिक्षा गुरु तो अनेक हो सकते हैं परंतु दीक्षा गुरु तो एक ही होता है। मनुष्य यदि सीखना चाहे तो कीट पतंगों से भी शिक्षा ग्रहण कर सकता है। श्री दत्तात्रेय भगवान ने सर्प, कछुए, मकड़ी, नारी और कुंवारी कन्या सहित सभी को गुरु बनाया।
सुदामा चरित्र की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि धनवान के साथ तो लोग मित्रता कर ही लेते हैं लेकिन वास्तव में वह संसार में बड़े महान होते हैं जो निर्धन से भी प्रेम करते हैं। निर्धन सुदामा को भी भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पलकों पर बिठाया। यह कथा हमें सीख देती है। रावण भी सोने के महल में रहता था और द्वारकाधीश श्रीकृष्ण भी सोने के महल में रहते थे लेकिन रावण ने अपने संपूर्ण जीवन में 10 ग्राम सोना भी दान नहीं किया लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने अवसर आने पर अपने मित्र के लिए दो मुट्ठी चावल खाकर दो लोक दे दिए।
भागवत कथा मानव को देवता बनाने के लिए है यदि जीवन सुधारना हो तो रामायण का आश्रय लीजिए और मृत्यु को सुधारना है तो परीक्षित की भांति भागवत का आश्रय लेना चाहिए। परीक्षित को श्राप लगा था कि सात दिन में तुम्हारी आयु समाप्त हो जाएगी। यदि विचार करें तो प्रत्येक मनुष्य की आयु केवल सात ही दिन की होती है क्योंकि सप्ताह में केवल साथ ही वार होते हैं। जो इन सात वारों को मंगलकारी बना लेता है उसका संपूर्ण जीवन मंगलमय बन जाता है।
इस मौके पर कमल किशोर जायसवाल, अनीता जायसवाल, मधु मित्तल, डॉ. नरेशचंद शर्मा, दयाशंकर शास्त्री, पंडित हिमांशु शास्त्री, पंडित जीवन शास्त्री, उमेश भट्ट सहित कई लोग मौजूद रहे।