गांव डाहर में मनरेगा कार्यों की जांच करतीं लोकपाल टीम।
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सरूरपुर (मेरठ)। विकास खंड सरूरपुर के गांव डाहर में मनरेगा के तहत कार्यों के नाम पर हुए घोटाले की जांच के लिए लोकपाल टीम निरीक्षण करने पहुंची। टीम ने मनरेगा के जॉब कार्ड धारकों से पूछताछ करते हुए कार्यों का भौतिक सत्यापन किया। इस दौरान कार्यों में बिना मजूदरी करने वाले मजदूरों को भी पैसे मिलने का मामला सामने आया। टीम ने गांव में मनरेगा के तहत कार्यों की मौके पर जांच पड़ताल करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कही।
गांव डाहर में मनरेगा के तहत कार्यों में घोटाले की शिकायत ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से की थी। जिसके बाद जांच के लिए मनरेगा लोकपाल की टीम शनिवार को डाहर गांव में पहुंची और कार्यों का भौतिक सत्यापान किया गया। ग्रामीणों ने जांच टीम को बताया कि गांव में मनरेगा के नाम पर लाखों की रुपयों की बंदरबाट की गई है। इसके तहत ऐसे लोगों से मजदूरी करना दर्शाया गया, जो पिछले तीन साल से बीमारी के चलते चारपाई पर हैं। वहीं शमीम की पत्नी हुस्नआरा, इब्राहिम को बिना काम कराए ही पैसा दिया गया है। मनरेगा मस्टरोल के आधार पर कई मामले जांच में सामने आए, जिनमें अनियमितता पाई गई। ग्रामीणों ने जांच टीम को नाला सफाई, खेल मैदान, कब्रिस्तान, शमशान पर ले गए, जहां मनरेगा के तहत कार्य हुआ सत्यापित नहीं हुआ। जांच के दौरान ग्राम प्रधान द्वारा मनरेगा में चहेतों को नियम विरूद्घ मजदूरी का भुगतान किया। वहीं, जांच टीम ने भी मौके पर ग्राम प्रधान के ना पहुंचने और सहयोग नहीं देने पर असंतोष व्यक्त किया। मनरेगा जांच टीम की लोकपाल अंशू त्यागी ने बताया कि मनरेगा के तहत ग्राम पंचायत में हुए कार्यों का भौतिक सत्यापन किया गया। इसके बाद बयान लेकर जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी व शासन को भेजी जाएगी। यदि मामले अनियमितता पाई जाती है तो एफआईआर और रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, खंड विकास अधिकारी अमित कुमार ने बताया कि मनरेगा में घोटाले की शिकायत पर गांव में मौके पर जाकर जांच की गई। ग्रामीणों द्वारा पेश किए गए साक्ष्य और प्रशासन के दस्तावेज से मिलान कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।