सपा और बसपा के लगभग फाइनल हो चुके सियासी साझे में गठबंधन धर्म का बेहद ख्याल रखने की बात सामने आ रही है। मंथन इस पर हुआ है कि कहीं किसी भी क्षेत्र विशेष में किसी एक दल का ही वर्चस्व न स्थापित हो जाए। यानी पश्चिमी और पूर्वी उप्र में दोनों को बराबर की हिस्सेदारी मिलेगी। साथ ही बॉर्डर स्कीम लागू रहेगी। एक ही जिले की सटी हुईं लोकसभा सीटों पर अलग-अलग दल को ही टिकट दिया जाएगा।
राजनीतिक मौसम की तासीर बदलने लगी है। लोकसभा चुनाव 2019 की बयार शुरू हो गई है। राजनीतिक पार्टियों ने भी अपने-अपने हिसाब से मोर्चेबंदी शुरू कर दी है। यूपी के लिए सबसे अहम है गठबंधन। सपा-बसपा का गठन इस समय चर्चा का विषय है। गठबंधन लगभग फाइनल ही माना जा रहा है। साथ में रालोद के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है। कहा जा रहा है कि रालोद को तीन सीटें गठबंधन देगा। हालांकि यह संख्या घट बढ़ सकती है। बाकी बची सीटों को आधा-आधा बांटने की बात सामने आ रही है।